
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 जनवरी।फुटाव के कार्यकारी अध्यक्ष और महासचिव द्वारा एक पत्र बिहार सरकार के मंत्री व विभाग को भेजा है जिसमें नवंबर और दिसंबर माह के शिक्षक और कर्मचारियों का वेतन और पेंशन के लिए अनुरोध किया गया है। शिक्षक और कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए तमाम शैक्षणिक, परीक्षा , कार्यालय, खेल कूद,युजीसी के गाइड लाइन का पालन करते हुए संस्थान को प्रतिष्ठित कर रहे हैं। लेकिन क्या बिना वेतन के संभव है,परिवार,बच्चों की शिक्षा व जरूरी खर्चो का वहन कैसे होगा?पेंशनधारी अपना व आश्रितों के मुख्य आधार है।इस स्थिति को कुर्सी पर आसीन लोगों को जानकारी नहीं है या समझ नहीं है की पारिवारिक जीवन कैसे चलता है?। वेतन के अभाव में नवंबर और दिसंबर तो बीत चुका, जनवरी भी आधा समाप्ति पर है लेकिन अभी तक भुगतान की कोई बात नहीं चली है। 5 जनवरी को पेंशन की चिट्ठी निकली लेकिन राशि नहीं विमुक्त की गई।इन्हीं ज्वलंत समस्याओं को लेकर कार्यकारी अध्यक्ष प्रो के बी सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह एमएलसी ने वेतन और पेंशन के लिए पत्राचार किया।
नेता द्वय ने बताया कि शिक्षा विभाग का लगभग पचास हजार करोड़ का वार्षिक बजट को डिलिंग व वितरण में कोई गड़बड़ी और न कोई आवाज उठती है लेकिन विश्वविद्यालय का मात्र 5 करोड़ का वार्षिक बजट में सरकार को बहुत परेशानी,रोज जांच और नये नये आदेश और बजट की समीक्षा निकलते रहता है, इसी आधार पर वेतन और पेंशन को अटका दिया जाता है जो घोर आपत्तिजनक है।जो जानकारियां मांगी गई है उसमें पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर सदस्यों की संख्या, नवनियुक्त शिक्षको की संख्या ,बीपीएससी एवं आयोग से स्वीकृत पदों की संख्या आदि है जो विभाग स्वयं करता है पूरी रिपोर्ट जिसके पास है वो विश्वविद्यालय से पूछा जाता है ताकि किसी प्रकार से शिक्षको, कर्मचारियों और पेंशनधारियों को परेशान किया जा सके, अपना वर्चस्व दिखाया जा सके। वार्षिक बजट की समीक्षा तीसरी बार हो रही है जो 8 जनवरी से 17 जनवरी करनी थी। क्या हुआ यह सरकार के फाइलों में है।यह विभाग के वर्चस्व की कहानी है। काम करने वालों को वेतन, पेंशनधारियों को पेंशन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करना विभाग और सरकार का काम है हम तो अपनी बात कहते ही रहेंगे।
