
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 नवंबर।कृषि भवन परिसर में मंगलवार को आरा प्रखंड के कृषकों के लिए रबी अभियान सह कृषक कर्मशाला का आयोजन किया गया।जिसका उद्घाटन संयुक्त रूप से जिला कृषि पदाधिकारी शत्रुघ्न साहू के भोजपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ पीके द्विवेदी आरा प्रखंड प्रमुख प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी आरा , सहकार भारती के प्रांतीय अध्यक्ष एवं जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रचालित कर किया ।इस अवसर पर किसानों को रवी के मौसम में दिये जाने वाले विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित जिला कृषि पदाधिकारी ने कृषि अवशेष का प्रबंध अन्य तरीकों से करें उसे जलाने की आवश्यकता नहीं है अन्यथा कई तरह की परेशानियां आपको भविष्य में हो सकती है। प्रखंड प्रखंड विकास पदाधिकारी में कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामना देते हुए अनुरोध किया कि आप अपने कृषि में विविधता लावे जिससे कि संसाधनों का बेहतर प्रयोग हो सके। प्रखंड प्रमुख ने किसानों को सरकार की योजनाओं में अधिक से अधिक भाग लेने के लिए अनुरोध किया और कहा की जल्द से जल्द आप अपने फसलों फसलों की बुवाई पूर्ण करें।डा द्विवेदी ने किसानों को तिलहन एवं दलहन में गंधक जिंक एवं बोरान के प्रयोग करने की जानकारी देते हुए अनुरोध किया आप अपने बीजों का उपचार नैनो डीएपी से आवश्य करें। एक एकड़ के बिज के लिए न्यूनातम 250 मिलीलीटर नैनो डीएपी की अवशयकता होगी। इस साल धान कितने की समस्या काफी अच्छी गई इसके पीछे असंतुलित उर्वरक प्रयोग की बहुत बड़ी भूमिका थी ।अतः आप अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करें और अपने खेतों में जैविक खाद तथा पोटाश का संतुलित प्रयोग करें। आने वाले समय में मौसम में बदलाव होने के कारण या तो फसलों में अत्यधिक विकास हो सकता है अथवा ज्यादा बढ़ाने के कारण गिरने की भी संभावना होती है। इससे बचाव के लिए क्लोरोमेक्वाट क्लोराइड 150 मिलीलीटर प्रति एकड़ फसल लगने के 50 दिनों के बाद 20-20 दिन के अंतराल पर तीन बार खड़ी फसल में छिड़काव करें। गेहुं की बुवाई करने के लिए हैप्पी सीडर, लकी सीडर, जैसे यंत्रों का प्रयोग करें इससे फसल अवशेष का बेहतर प्रबंधन होता है और अगर ज्यादा है तो उसका आप कंपोस्ट भी वेस्ट डीकंपोजर के माध्यम से बना सकते हैं ।इसकी खेती करने के बाद अगर प्रारंभिक अवस्था में चौड़ी पत्ती वाली खर-पतवार आती है 2 से तीन पत्तो की अवस्था में 2 4 डी ईथाइल इस्टर 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ छिड़काव कर के नियंत्रण कर सकते हैं। आगे की अवस्था बन गेहूं आने पर 28 से 30 दिनों के अंदर सल्फोसल्फ्यूरान 14 ग्राम प्रति एकड़ प्रयोग कर सकते हैं वर्तमान समय में फसलों में पत्तियों में अगर धब्बे आते हैं खासकर के मटर चना मसूर में तो प्रोपिकोनाजोल 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ छिड़काव कर दीजिए। कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में उचित खाद बीज दवा आदि का प्रयोग कर किसान अधिक से अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। कहीं असुविधा हो तो कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक से मिलकर जानकारी प्राप्त कर ले।
