नाट्य विभाग के विद्यार्थियों ने किया प्रभावशाली मंचन।
खैरागढ़/ छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय ) 29 मार्च। विश्व रंगमंच दिवस पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में महारथी नाटक के सप्तम अंक तथा नींद क्यों रात भर नहीं आती नाटक का प्रभावशाली मंचन हुआ। कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम महारथी नाटक का मंचन हुआ, जहां दानवीर कर्ण और उनकी माता कुंती के बीच हुए संवाद को दर्शाया गया। कर्ण के युद्ध भूमि में जाने से पूर्व माता कुंती उनसे मुलाकात करने जाती हैं और दोनों के बीच अत्यंत मार्मिक और भावनात्मक संवाद होता है। कुंती कर्ण से आग्रह करती हैं कि वह पांडवों का साथ दे और अपने भाइयों के विरुद्ध युद्ध न करे, परंतु कर्ण कुंती के अनुरोध को स्वीकार नहीं करते। वह दुर्योधन के प्रति अपनी निष्ठा को सर्वोपरि मानता है और उसी पक्ष में रहने का निश्चय करता है।
द्वितीय प्रस्तुति नींद क्यों रात भर नहीं आती नाटक की हुई। यह नाटक हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार सुरेन्द्र वर्मा द्वारा लिखित है। यह नाटक एक मनोवैज्ञानिक रेडियो नाटक है, जो एक अकेली युवती के जीवन की एक रात के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी एक ऐसी महिला पर केंद्रित है, जिसे रात में नींद नहीं आती। वह बेचैन और मानसिक रूप से व्याकुल रहती है और इसी बेचैनी में वह आधी रात को अनजान लोगों को फोन करने लगती है। इन अप्रत्याशित बातचीतों के माध्यम से मानव जीवन, रिश्तों, भावनाओं और अकेलेपन के विभिन्न पहलू सामने आते हैं। हर फोन कॉल एक नई दुनिया खोलता है, जिसमें दिखता है इंसानी अकेलापन, दबी हुई इच्छाएं, भावनात्मक दूरी और संवाद की आवश्यकता। जैसे-जैसे रात बीतती है, नाटक नायिका के अंतर्मन में और गहराई तक उतरता है। उसके डर, चिंताएं और अधूरी भावनाएं उजागर होती हैं। महारथी (सप्तम अंक) के लेखक विभांशु वैभव जी हैं। उक्त नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशक डॉ. प्रमोद पांडेय रहे, वहीं सहायक निर्देशक सूर्य प्रकाश रहे। नाट्य प्रस्तुति भैरवी साहू, अंकित सिंह, हर्ष गिरी भट्ट एवं आकांक्षी मेश्राम ने दी। वहीं गायन में भूषण चौधरी, राजवैद्य, आकाश, तबले पर सर्वेश तथा प्रकाश विन्यास में अमित पटेल रहे।
दूसरा नाटक ‘क्यों रात भर नींद नहीं आती’ हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार सुरेन्द्र वर्मा द्वारा रचित नाटक है, जिसकी परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ. प्रमोद पांडेय ने किया। संगीत सूर्य प्रकाश ने दिया तथा प्रकाश विन्यास में अनुराग प्रकाश रहे। नाट्य प्रस्तुति डॉली अहिरवार, हर्ष गिरी भट्ट, ध्रुव सिंह, दिशा चतुर्वेदी, यश बंसल ने दी। कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने सभी विद्यार्थियों को बेहतर प्रस्तुति के लिए बधाई दी।
अधिष्ठाता एवं थियेटर विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने परीक्षा दौर में भी इतने अच्छे प्रदर्शन के लिए सभी को साधुवाद दिया। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता जितने कष्ट कंटकों में का पाठ करते हुए विद्यार्थियों को विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने और संघर्ष करने की प्रेरणा दी। सहायक प्राध्यापक डॉ. कौस्तुभ रंजन ने सभी को विश्व रंगमंच की बधाई देते हुए बेहतर प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं।



