
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 17 नवम्बर। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के करजा गाँव में प्रवचन करते हुए महान संत श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि स्नान का मतलब अनीति, अन्याय, बेईमानी, अधर्म और पाप के त्याग से है। शास्त्र में बताया गया है कि जिस घर, समाज, राष्ट्र , प्रजा और समुदाय में ईश्वर को कभी याद न किया जाता हो, कभी चिंतन नही किया जाता हो, नित ध्यान नही किया जाता हो, गुण गान नही किया जाता हो वह स्थान शमशान के समान है। जहाँ पर सदाचारी, संत, महात्मा, ज्ञानी लोगों का आदर नही किया जाता हो, बालकों को शिक्षा नही दिया जाता हो उस घर को शमशान के समान बताया गया है। जहाँ पर जुआ खेला जाता हो, शराब का सेवन होता हो, मांस मदिरा इत्यादि का सेवन होता हो वह घर शमशान के समान है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य पशुओं के समान भोजन करे तथा संतानोत्पत्ति करे तो मानव और पशु में कोई अंतर नही रह जाता है। भोजन तो अनेक योनियों में हम करते हैं। शयन तो अनेक योनियों में हम करते हैं। संतान उत्पति तो अनेक योनियों में करते हैं। केवल इसके लिए इस संसार में हम जन्म नही लिए हैं। परमात्मा हमलोगों को मनुष्य नही बनाते बल्कि इसके जगह पर और कोई जीव-जन्तु बनाते। मानव की पहचान संस्कृति, संस्कार, सभ्यता, सरलता, सहजता और कोमलता से है। यदि ये गुण मनुष्य मे न हों तो मनुष्य पशु के समान है। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा, अध्यक्ष राजू ओझा (मुखिया),अमरनाथ सिंह (संयोजक), महेश ओझा ,गजेंद्र ओझा, हरेंद्र यादव, देव शंकर यादव, दीपक पांडे, अतुल यादव, सोमनाथ यादव, मनमोहन यादव, पवन ओझा, मनीष यादव, विनोद यादव, मोनू यादव आदि उपस्थित थे।
