
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 नवंबर।हिंदी भाषी क्षेत्र बिहार, यूपी का सर्वाधिक लोकप्रिय, सामाजिक मान्यता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक छठ महापर्व हर्ष और उल्लास के साथ परिवार सहित मनाया गया। इस महान पर्व को लेकर हिंदुओं में एक उमंग और उत्साह का वातावरण बना रहता है जिसके लिए एक साल इंतजार करना पड़ता है। परिवार के कहीं भी दूसरे क्षेत्र में लोग रहते हैं लेकिन इस पर्व के लिए अपने जन्मभूमि पर आकर सामूहिक रूप से छठी मैया का व्रत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान भास्कर और छठी मैया का पूजन करने से मानसिक शांति, रोग व्याधि का नाश और परिवार में वंश वृद्धि के साथ साथ खुशी का वातावरण बना रहता है।
भोजपुर जिले का मुख्यालय आरा में कई प्रमुख घाट है यहां शहर भर के हजारों लोग एकत्रित होकर भगवान भास्कर की सामूहिक रूप से पूजा अर्चना करते हैं। प्रमुख घाट में आरा का कलेक्ट्री घाट जहां सूर्य मंदिर स्थापित है ,चंदवा का सूर्य मंदिर शिवगंज का सूर्य मंदिर ।इस प्रकार अन्य कई क्षेत्रों में सूर्य मंदिर स्थापित है जहां श्रद्धा भक्ति और पूरी पवित्र भावना के साथ महिलाएं और पुरुष भी पूजा अर्चना करते हैं। इन सभी घाटों पर शहर भर के तमाम लोग हजारों हजार की संख्या में उपस्थित होकर भगवान भास्कर और छठी मैया से सबके कल्याण हेतु प्रार्थना करते हैं। चार दिनों का यह सबसे बड़ा अनुष्ठान होता है इसमें परिवार के एक छोटे से लेकर बड़े तक सभी सम्मिलित होते हैं।
शुक्रवार को चार दिवसीय भगवान भास्कर का अनुष्ठान अर्घ्य देकर पूर्ण हो गया। इश दौरान महिलाएं चारों दिन दिन रात जागरण करते हुए छठी मैया की गुणगान की बखान गीतों के माध्यम से करती है उन्हें याद करती है याद करती है। इसमें प्रसाद का जो उपयोग होता है वह भी बिल्कुल शुद्ध रूप से बनता है। स्नान ध्यान पूजा भजन पकवान फल फूल सभी शुद्ध रूप से उपयोग में ले जाते हैं। शुद्ध जल ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं आटा सबमे पवित्रता का भाव परिलक्षित होते रहता है। विश्व पूजा का खास महत्व है कि इसमें ना कोई बड़ा ना कोई छोटा ना पूजा का झंझट न पुजारी से मतलब सभी भगवान के दरबार में समान रूप से उपस्थित होते हैं और अपनी मन्नते भगवान के सामने रखते हैं।अपने से अर्घ्य देना, प्रसाद समर्पित करना होता है। विशेष बात है कि भगवान भास्कर प्रकृति के सबसे सक्षम, साक्षात और जीवन दाई के रूप में सबको समान रूप से प्रकाशित करते हैं ,अवसर देते हैं। आज के दिन उदयमान भास्कर को प्रातः कालीन बेला में लालिमा को देखते हैं छठव्रतियों का हृदय प्रसन्नता से खिल उठता है। इनका दर्शन कर धन्य धन्य हो जाते हैं।
