
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 8 नवम्बर। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ लोकआस्था एवं सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ संपन्न हो गया। सुबह में छठव्रतियों ने गंगा नदी सहित अन्य नदियों, तालाबों तथा घरों में बनाये गये कृत्रिम तालाब मे भरे पानी में खड़ा होकर तथा सूप में ठेकुआ, विभिन्न प्रकार के फल और जलते दीपक को रखकर उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। और इसी के साथ चार दिवसीय इस महापर्व की इतिश्री हो गई।
36 घंटे के निर्जला उपवास के दौरान षष्ठी को अस्त होते तथा सप्तमी को उदय होते रक्तिम रवि या सूर्य के लाल स्वरूप को अर्घ्य देने के बाद छठव्रतियों ने पारण किया। अर्घ्य देने के बाद छठव्रतियों ने प्रसाद एवं चाय ग्रहण किया। घर आने के बाद छठव्रतियों ने सपरिवार चावल, दाल, सब्जी और तरह-तरह का बजका खाया और उपवास को तोड़ा। पिछले चार दिनों से माहौल छठमय बना हुआ था। घरों से लेकर सड़कों और चौक चौराहों पर चारों तरफ छठ के मनभावन गीत गूंज रहे थे। माहौल भक्तिमय एवं छठमय बन चुका था। चारों तरफ साफ सफाई की गई थी। सरकारी स्तर से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी गली, मोहल्लों और सड़कों की सफाई मे सहभागिता दी।
गंगा घाट सहित अन्य नदियों के घाटों को सीरीज बल्ब सहित अन्य आकर्षक लाइटों से सजाया गया था। तालाबों में बने छठ घाटों पर भी लाइटिंग की अच्छी व्यवस्था की गई थी। छठ घाटों पर जाने वाली सड़कों सहित अन्य जगहों की साफ सफाई की गई थी तथा आकर्षक ढंग से सजाया गया था। तरह-तरह के आकर्षक और मनभावन सजावट से गाँव से लेकर शहरों तक की सुंदरता में चार चांद लग गए थे।
