
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 अक्टूबर। गुरूवार को शिव देबी हनुमतधाम कारीसाथ में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में पू.जीयरस्वामी महाराज के कृपा पात्र आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने दशम स्कंध की दिव्य कथा नंदोत्सव के क्रम में पूतनोधार की कथा सुनाई।
आचार्य जी ने कहा कि भगवान कितने कृपालु है कि उन्हें मारने के उदेश्य से विषपान कराने वाली पूतना को मोक्ष प्रदान कर दी। जरा सोचिये बिना श्रद्धा यह गति पूतना प्राप्त करती है,तो क्या श्रद्धा के साथ प्रभू को याद करेगा तो उसे परम गति नहीं होगी। आचार्य जी श्रीकृष्ण की बाल लीला का जीवन्त चित्रण करते हुए माखनचोरी,मिट्टी भक्षण, नलकूबर मणिग्रीव उद्धार की कथा कहते हुये श्रीकृष्ण को माँ यशोदा द्वारा ऊखल में बांधते समय दो आंगुल रस्सी छोटा होने का आध्यात्मिक अर्थ बताया और कहा श्याम सुन्दर स्वयं रस्सी से बंधकर भी यक्षपुत्रों को बंधनमुक्त करते है,मुक्ति का श्रेय ऊखल को देते । फल बेचने वाली माँ की कथा कहते हुये कहते है कि जो बालक को प्रसन्न करेगा उसे भगवान प्रसन्न करते है। दुर्भाग्य है कि आज प्रकृति प्रदत माँ का दूध भी बालको को नहीं पीने दिया जा रहा है
माँ बोतल पकड़ा देती।आचार्य जी कहते है दुष्ट जल्दी हार नहीं मानता ,न दुष्टता करने से, न क्षति पहुंचाने से।पूतना के पश्चात अनेक राक्षसों को श्रीकृष्ण को मारने हेतु कंस भेजता रहा।जब उसे पता चला कि अब बच्छड़ो को चराने लगे हैं तो वत्सासुर, बकासुर को भेजा, अघासुर को भेजा,इसके पूर्व शकटासुर, तृणावर्त सुर को भेजा,कोई नहीं लौटा, कंस की चिंता बढ़ती गई।आचार्य जी ने बताया भगवान सबको अवसर देते है ,पर सब लाभ नहीं उठा पाते,जैसै राजा परीक्षित को शाप मीला की सातवें दिन आपका अन्त होगा ,वैसे ही कंस को भी सूचना दी गई कि देवकी के आठवे गर्भ से उत्पन्न बालक तूझें मारेगा। राजा परीक्षित समझ गये ,पर कंस समझते हुए ना समझी कर बैठा, भगवान को मारने की योजना बनाता रहा।आचार्य जी ने कथाक्रम को बढ़ाते हुए ब्रह्मा जी के मोहनिवारण की कथा बच्छड़ो, गोपबालक की चोरी की कहते हुये कहा कि अहंकार किसी को नहीं छोड़ा।पुनः धेनुकासुर उद्धार की कथा कहते हुये कलिया नाग को यमुना से रमनक जाने की कथा कहते हुये भारत की नदियों को प्रदूषण मुक्ति परबल दिया। आज छप्पन भोग लेगेगा और रुकमणि द्वरिकाधीश विवाह संपन्न होगा, जिसकी तैयारी कल से ही चल रही है। दूर दूर से भक्त श्रीकृष्णामृत पान करने आरहे है।सबकी यथोचित सेवा हो रही है।व्यवस्था को कर्नल राणा प्रताप सिंह, सुरेंद्र सिंह, अशोक सिंह,वीरबल सिंह, गोरा डॉक्टर, मुन्ना सिंह, राम यश सिंह ,कैलाश सिंह ,जय नारायण सिंह, श्रीनिवास सिंह ,रेणुका देवी ,नीलम सिंह बल्लू देवी आदि सहित युवको की टोली संभालन मे लगी है।प्रति दिन आरा अतिविशिष्ट महानुभाव कथा झांकी दर्शन हेतु पधार रहे है।दिल्ली से पधारे श्रृंगारी रघुनंदन स्वामी जी द्वारा प्रस्तुत कथाक्रमानुसार झाकियां मन मोह लेती है।
