
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 अक्टूबर।आज बहुत दिनों से ऐच्छिक स्थानांतरण की आश लगाए शिक्षकों को नई स्थानांतरण नियमावली से निराशा हाथ लगी।राज्य के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बनाई गयी नई स्थानांतरण नियमावली पर बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ( गोपगुट ) भोजपुर ने प्रतिक्रिया जारी करते हुए इसे शिक्षक हितैषी कम एवं शिक्षक विरोधी अधिक बताया है। बातचीत के क्रम में जिला सचिव धर्म कुमार ने बताया कि यह नीति शिक्षकों के मौलिक अधिकार पर हमला,बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने में बाधक, शिक्षकों के लिए अहितकारी और उनके बच्चों के भविष्य को बिगाड़ने का षड्यंत्र भी है।
इसके पूर्व भी सरकार द्वारा इस तरह की नियमावली बनायी गयी थी जो चार वर्ष के बाद भी सफल नहीं हो सका।स्थानांतरण एवं पदस्थापन नीति तय करते वक्त मानवीय पहलू एवं शिक्षक के हितों पर विचार किया जाना चाहिए था।जो ऐसा न कर नियमावली को शिक्षकों के ऊपर जबरन थोप दिया गया है l
इन्होंने बताया की सक्षमता उत्तीर्ण शिक्षकों के मामले में सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिर नई स्थानांतरण नीति लाकर शिक्षकों की समस्या को और पेचीदा बना दिया गया है। गृह अनुमंडल, गृह प्रखंड एवं गृह पंचायत में पदस्थापन नहीं करना शिक्षकों के हित में नहीं है। बिहार के गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने में बाधक सिद्ध होगा क्योंकि ऐच्छिक स्थानांतरण नहीं होने एवं घर से दूर रहने के कारण परेशान शिक्षक से बेहतर परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है, अनेक सेवानिवृति के कगार पर है।ऐसे में उन्हें घर से दूर भेजना उन्हें कारागार में रखने से कम नहीं है।ऐसी स्थिति में सरकार संगठन की बातों पर पुनर्विचार करे यही समय की मांग है।
