
जीविका समूह से ऋण ले कृत्रिम फूलों के निर्माण से की लाखो की कमाई।

सरस मेले की भव्यता से विदेशी सैलानी भी हुए मुरीद।

भारत की लोकसंस्कृति और कला का आधुनिक युवा पीढ़ी भी ले रही आनंद।

सरस मेले की ख्याति से राज्य भर के आगंतुक कर रहे खरीदारी।

जीविका से जुड़ी महिलाओं में बढ़ रहा आत्मविश्वास।

ग्रामीण शिल्प कलाकृतियों सहित विभिन्न देशी उत्पादों से लोग हो रहे परिचित।

जीविका दीदी की रसोई का लोग ले रहे आनंद।

बांस और लकड़ी से बने हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का है केंद्र।

मेले के तीसरे दिन शुक्रवार को लगभग 27 लाख का महिला उद्यमियों ने किया व्यापार।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)21 सितंबर।ग्रामीण क्षेत्रों में आये बदलाव की लहर इन दिनों सरस मेला में भी देखने को मिल रही है। आधुनिकता से परे सरस मेला युवाओं और सैलानियों को भी लुभा रहा है। यहाँ आकर युवा पीढ़ी और विदेशी सैलानी हमारे देश की सदियों पुरानी लोक कला , शिल्प , संस्कृति, परंपरा और स्वाद से रूबरू हो रहे हैं। हस्त शिल्प, और देशी व्यंजनों के प्रति हर वर्ग का आकर्षण देखते ही बन रहा है l
सरस मेला में बिहार समेत देश के कोने-कोने से आई महिला उधमियों के स्टॉल्स इसकी बानगी पेश कर रहे हैं। मेले में आई ग्रामीण महिला उधमियों को देखकर यही लगता है कि महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति हुई है l
सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि राज्य के अन्य जिलों से भी ग्रामीण शिल्प और कलाकृतियों के कद्रदान सरस मेला में लगे देशी उत्पाद को अपने पसंद एवं जरुरत के हिसाब से खरीद रहे हैं l
सरस मेला में विभिन्न स्टॉल पर घरेलु महिला से कुशल उद्यमी बनी महिलाएं भी खुद के द्वारा निर्मित उत्पादों को लेकर उपस्थित हैं। माल्ही देवी बिहार के दरभंगा जिला के कुशेश्वर स्थान से आई हैं।माल्ही देवी के पति कुंदन पासवान पहले हरियाणा जिला के करनाल में रिक्सा चलाते थे।माल्ही भी उनके साथ ही रहती थी। लेकिन अब इन दोनों की पहचान कुशल उद्यमी के रूप में हैं।माल्ही ने करनाल में कृत्रिम फूलों का निर्माण करना सीखा था।2014 में दोनों अपने घर लौटे, माल्ही जीविका मित्र के माध्यम से लक्ष्मी जीविका स्वयं सहायता समूह से जुडी l समूह से क्रमशः 10 हजार , 30 हजार और 50 हजार रूपया ऋण लिया और कृत्रिम फूल-पत्ते का निर्माण एवं बिक्री शुरू की।अपने स्वयं सहता सरस मेला में उनके द्वारा निर्मित फूलों की बिक्री शुरू हुई l अब वो लगातार सरस मेला में फूलों का स्टॉल लगाती हैं। बांस, डंठल, बीज, ताड़ का पत्ता, मकई का छिलका, शोला वुड आदि से कृत्रिम फूलों का निर्माण करती हैं। जिनकी कीमत 20 रुपये से लेकर 7 सौ रुपये तक है।पिछले साल गाँधी मैदान में आयोजित सरस मेला में इन्होने फूलों की बिक्री कर डेढ़ लाख रूपया का शुद्ध मुनाफा कमाया था।मिनी सरस में उन्होंने 60 हजार रूपया शुद्ध मुनाफ़ा कमाया था l माल्ही देवी के पति अब इनके साथ उनके क्रत्रिम फूलों के व्यवसाय में मदद कर रहे हैं l इनका 10 वर्षीय बेटा पढाई कर रहा है l माल्ही देवी बताती हैं कि जीविका की मदद से ही उनके जीवन में बदलाव आया है l सरस मेला उनके जीने का आधार है l यहाँ से हुई आमदनी से वो अपना परिवार चलाती हैं l सरस मेला में इनके फूलों की मांग हैं l इसके साथ ही इनका मान-सम्मान भी है l बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 18 सितंबर से आयोजित है l महज तीन दिनों में 55 लाख 45 हजार से ज्यादा के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है l मेला 27 सितंबर 2024 तक चलेगा l
बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों से आये ग्रामीण महिला उद्यामिओं के द्वारा बनाये गए ग्रामीण शिल्प, कलाकृतियों और विभिन्न उत्पाद से लोग परिचित हो रहे हैं वहीँ बुजुर्ग अपने समय के शिल्प को देखकर भाव बिहोर हो रहे हैं l कसीदाकारी किये हुए चादर को देखकर संगीता सिंह बताती हैं कि बिल्कुल ऐसे ही सिलाई-कढ़ाई मेरी नानी किया करती थी l उन्होंने कसीदाकारी किये हुए चादर और परिधान को ख़रीदा भी l सरस मेला परिसर में हस्तशिल्प के साथ ही देशी व्यंजनों के प्रति भी लोगों का आकर्षण विशेष बना हुआ है l
मेले के एक विशेष भाग में आगंतुकों के लिए खाने-पीने के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाने का अवसर भी प्रदान किया गया है l जहाँ बिहार समेत अन्य राज्यों के भी देशी मिठाइयाँ एवं व्यंजन उपलब्ध है l जीविका दीदियों द्वारा संचालित “दीदी की रसोई” के स्टॉल पर लिट्टी चोखा, ढोकला, दही बड़ा, चुडा घुघनी , लिट्टी- मुर्गा, मक्का मसाला, लस्सी, आलू चाप, रसगुल्ला और गुलाबजामुन जैसे मिठाइयों एवं व्यंजनों का लुत्फ़ आगंतुक उठा रहे हैं l रोहतास की गोड़ई मिठाई, बाढ़ जिले का पेड़ा और लाइ, सुपौल का खाजा, पटना का चनाजोर गरम, किसान चाची का मशहूर अचार ,रसमलाई, टिक्की चाट, माल पुआ, चन्द्र कला, मुंग दाल की पकौड़ी , पिपरा का खाजा, पापड़ी चाट, बटाटा पुड़ी, भेल पुड़ी, बालू शाही, खुरमा , मकई का लड्डू और दाल बाटी सभी एक ही छत के नीचे विभिन्न स्टॉल पर चखने के लिए परोसे गए हैं।मेला के तीसरे दिन 20 सितंबर को 27 लाख 63 हजार से अधिक की राशी के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई l खरीद-बिक्री का आंकड़ा स्टॉल धारकों द्वारा लिए गए रिपोर्ट के आधार पर आधारित होता है l
ग्रामीण शिल्प, कलाकृतियों और उत्पाद के प्रति लोगों का आकर्षण बना हुआ है l शुक्रवार को अनुमानत: 33 हजार से अधिक लोग आये और खरीददारी की l
बिहार सरस मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित,प्रवेश निःशुल्क है।
