
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 सितंबर।आज वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध तपेश्वर सिंह इंदु महिला महाविद्यालय आरा में तदर्थ समिति के द्वारा लिए गए निर्णय का विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा अनुमोदन नहीं किये जाने के विरोध में अब कॉलेज के शिक्षक, शिक्षिकायें एवं कर्मचारी सड़क पर उतरेंगे।
शिक्षक एवं कर्मचारियों ने संघ के बैनर तले आंदोलन पर उतरने और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में तालाबंदी करने का फैसला लिया है। इस फैसले की लिखित सूचना अपने अपने हस्ताक्षर के साथ कुलपति एवं कुलसचिव को दे दिया है।शिक्षक, शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने लिखित सूचना में कहा है कि लगभग छः महीने से अधिक समय से उनके महाविद्यालय में खाता संचालन पर रोक लगाई गई है।इससे शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं हो रहा है जिससे शिक्षक, शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों के बीच अब भुखमरी की स्थिति आ गई है। पिछली बैठक में तदर्थ समिति ने खाता संचालन का निर्णय लिया है और इससे जुड़ी संचिका वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति के समक्ष पहुंची है।
बावजूद बार बार कॉलेज के विरोध में एक आवेदन देकर पूरी व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारी प्रश्रय भी दे रहे हैं और यही वजह है कि पुनः उसके आवेदन पर खाता संचालन से जुड़ी संचिका पर तदर्थ समिति के लिए गए निर्णय का अनुमोदन कुलपति द्वारा नहीं किया जा रहा है।
शिक्षक, शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने सोमवार तक खाता संचालन शुरू करने के तदर्थ समिति के निर्णय का अनुमोदन नहीं करने पर गुरुवार से विवि के मुख्य प्रशासनिक भवन में तालाबंदी की चेतावनी दे दी है।
कुलपति को दिए गए अल्टीमेटम की कॉपी बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति के साथ ही राजभवन के प्रधान सचिव, शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा निदेशक, भोजपुर के डीएम, एसपी, सदर एसडीओ, तदर्थ समिति के अध्यक्ष, यूआर आदि को भी भेजी गई है।.कुलपति को संघ की तरफ से दिए गए आवेदन पर कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सुनीता राय,शिक्षक प्रतिनिधि डॉ. सियामती राय, सहायक प्रोफेसर डॉ.निभा परमार, डॉ. उर्मिला सिंह, डॉ. इन्द्राणी कुमारी, डॉ. रागिनी कुमारी, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार,डॉ. अंजू कुमारी, डॉ. शिव शक्ति, डॉ. सुरेन्द्र, डॉ. संदीप कुमार, सुरेश सिंह, विजय सिंह, सीमा कुमारी, अमिया रंजन, डॉ. विभा सिंह,दिलीप कुमार, सुरेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, उमा सिंह, अशोक सिंह समेत कई शिक्षक, शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किये हैं।
