
RKTV NEWS/प्रो रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’,13 अगस्त।भारत के पूरबी भाग में, खास कर के बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, आ नेपाल के तराई आदि क्षेत्र में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के व्यापक प्रसार बा। एकर जड़ भारत के प्राचीन इतिहास में गहिराह बा, आ भाषा आ संस्कृति भारत के बिबिधता के एगो महत्त्वपूर्ण हिस्सा हवे। भोजपुरी खाली एगो भाषा ना ह, बलुक एह क्षेत्र में रहे वाला लाखों लोग के पहचान के माध्यम भी ह। एह निबंध में हमनी के भोजपुरी स्वतंत्रता आ भोजपुरी संस्कृति के संबंध के विश्लेषण करब जा, आ ई समझे के कोशिश करब जा कि भोजपुरी संस्कृति के स्वतंत्रता संग्राम में कइसे योगदान रहल आ आजु भोजपुरी के आजादी के का मतलब बा।
भोजपुरी संस्कृति अपना विविधता, लोक संगीत, नृत्य, परब, आ समृद्ध साहित्य खातिर जानल जाले। भोजपुरी भाषा एगो अभिव्यक्ति के माध्यम ह जवना में आम जनता के भावना, विचार, आ जीवनशैली के झलक मिलेला। भोजपुरी साहित्य खास कर के लोककथा आ कहानी के माध्यम से एह क्षेत्र के सामाजिक आ सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षित करेला।
भोजपुरी संस्कृति में लोक संगीत आ नृत्य के एगो महत्वपूर्ण स्थान बा। लोक संगीत में बिरहा, सोहर, कजरी, चईती आ फगुआ जइसन गीत प्रमुख बा, जवना में जीवन के विभिन्न पहलु के अभिव्यक्ति बा। भोजपुरी लोकनृत्य एह क्षेत्र के सांस्कृतिक धरोहर के हिस्सा ह आ एकरा के राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देले बा।
भोजपुरी संस्कृति के परब आ परम्परा एह क्षेत्र के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्शावत बा। छठ पूजा, होली, दिवाली आ मकर संक्रांति जइसन त्योहार एह संस्कृति के महत्त्वपूर्ण अंग हवें, समाज में एकता, सहयोग, आ धार्मिक सहिष्णुता के बढ़ावा देवे वाला।
भोजपुरी साहित्य में अइसन कहानी, कविता, आ नाटक शामिल बा जवन एह क्षेत्र के सामाजिक संरचना, इतिहास, आ जीवनशैली के दर्शावत बा। कवि भिखारी ठाकुर अपना लेखनी के माध्यम से एह क्षेत्र के समस्या आ संघर्ष के रेखांकित कइले बानी। उनकर नाटक ‘बिदेसिया’ आजुओ भोजपुरी संस्कृति के एगो महत्वपूर्ण अंग बा।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भोजपुरी क्षेत्र के अहम भूमिका रहल बा। एह क्षेत्र के लोग अंग्रेज शासन के खिलाफ संघर्ष कइलस आ आजादी पावे खातिर आपन जान दे दिहलस। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनता के संगठित करे, चेतना के जगावे में, संघर्ष करे खातिर प्रेरित करे में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के अहम भूमिका रहे।
भोजपुरी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी, जइसे कि स्वामी सहजानंद सरस्वती, बाबू कुंवर सिंह आदि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्त्वपूर्ण नेता लोग में शामिल रहलें। उ ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष कइले अवुरी जान के बलिदान देले। स्वामी सहजानंद सरस्वती किसानन के अधिकार खातिर लड़ले आ अंगरेजी सरकार का खिलाफ संगठित कइले।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोग के जागरूक करे में भोजपुरी साहित्य के अहम भूमिका रहे। ओह समय के कवि-साहित्यकार अपना रचना के माध्यम से जनता में देशभक्ति के भाव जगवले आ संघर्ष के प्रेरणा देले। आजादी के भावना भोजपुरी लोकगीतन में भी झलकत बा, जवना में किसान, मजदूर, आ आम जनता के संघर्ष के चित्रण बा।
आजादी हासिल कइला के बाद भी भोजपुरिया क्षेत्र के सामने बहुत चुनौती रहे। देश भले ही स्वतंत्र हो गईल, लेकिन राष्ट्रीय स्तर प भोजपुरी भाषा संस्कृति के उ जगह ना मिल पावल, जवना के उ हकदार रहे। भोजपुरी भाषा के शिक्षा आ प्रशासनिक स्तर पर जरुरी मान्यता ना मिलल, जवना के चलते एह भाषा के अस्तित्व खतरा में पड़े लागल।
आज के समय में भोजपुरी संस्कृति अपना के बदलत समाज के अनुकूल बना लेले बिया, लेकिन ओकरा सोझा बहुत चुनौती के सामना करे के पड़ता। वैश्वीकरण, शहरीकरण, आ नया पीढ़ी के बदलत पसंद से भोजपुरी संस्कृति के फेर से परिभाषित करे के जरूरत पैदा भइल बा।
पिछला कुछ दशक में भोजपुरी सिनेमा के अपार लोकप्रियता मिलल बा। ई सिनेमा भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के नया रूप में पेश कर रहल बा, जवन एकरा के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचावे में सहायक बा। हालांकि कुछ भोजपुरी फिल्म आ गीतन में फूहड़ता के बढ़ावा देबे के आरोप भी लागल बा जवना से एह संस्कृति के असली छवि कलंकित हो जाला।
भोजपुरी भाषा के बचावे खातिर बहुत प्रयास हो रहल बा, लेकिन अभी तक एकरा के राजभाषा के दर्जा नईखे मिलल। भोजपुरी भाषा आ साहित्य के संरक्षण आ संवर्धन खातिर कई गो संस्था आ संस्था कार्यरत बाड़ी सऽ। आज भी भोजपुरी भाषा के कई गो स्कूल आ संस्थान में वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ावल जा रहल बा, लेकिन एकरा के मुख्यधारा में ले आवे खातिर अउरी प्रयास के जरूरत बा।
भोजपुरी संस्कृति अब खाली भारत तक सीमित नइखे रहि गइल; प्रवासी के माध्यम से भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सा में पहुंचल बा। मारीशस, फिजी, सूरीनाम, आ त्रिनिदाद जइसन देशन में भोजपुरी भाषी लोग के भारी संख्या बा, जे आपन संस्कृति आ भाषा के संरक्षित कइले बा। ओहिजा के भोजपुरिया समुदाय अपना सांस्कृतिक धरोहर के ना खाली जिंदा रखले बा बलुक ओकरा के फेर से परिभाषित कइले बा. ई वैश्वीकरण भोजपुरी संस्कृति के नया अवसर प्रदान करेला, बाकिर साथे-साथे ओकरा के चुनौती के सामना करे खातिर भी मजबूर करेला।
भोजपुरी आजादी के मतलब खाली राजनीतिक भा सामाजिक स्वतंत्रता तक सीमित नइखे; एह में भाषा, संस्कृति, आ पहिचान के संरक्षण आ संवर्धन भी शामिल बा।
एह क्षेत्र के लोग के पहचान आ संस्कृति के बचावे खातिर भोजपुरी भाषा के संरक्षण जरूरी बा। एकरा खातिर जरूरी बा कि भोजपुरी भाषा के शिक्षा आ प्रशासन में उचित स्थान दिहल जाव। एकरा अलावे साहित्यिक गतिविधियन के बढ़ावा देके नया पीढ़ी के भोजपुरी साहित्य से जोड़े के प्रयास होखे के चाहीं।
भूमंडलीकरण आ आधुनिकता के दौर में भोजपुरी संस्कृति के आपन पहचान बनवले राखे खातिर संघर्ष करे के पड़ेला। एकरा खातिर जरूरी बा कि नया पीढ़ी के हमनी के सांस्कृतिक धरोहर से परिचय करावल जाव आ ओकरा के बचावे खातिर प्रेरित कइल जाव।
भोजपुरी क्षेत्र के आर्थिक आ सामाजिक विकास के बिना एह क्षेत्र के स्वतंत्रता के पूरा ना मानल जा सकेला। एकरा खाती जरूरी बा कि सरकार अवुरी समाज मिल के ए क्षेत्र के विकास खाती योजना बनावे अवुरी ओकरा के प्रभावी ढंग से लागू करे।
भोजपुरी स्वतंत्रता आ संस्कृति के बीच के संबंध गहिराह आ महत्वपूर्ण बा। ई आजादी खाली राजनीतिक ना ह, बलुक सांस्कृतिक, भाषाई, आ सामाजिक स्वतंत्रता के प्रतीक भी ह। स्वतंत्रता संग्राम में भोजपुरिया क्षेत्र के अहम भूमिका रहल, आ आजुओ आपन पहचान आ संस्कृति के बचावे खातिर संघर्ष कर रहल बा। भविष्य में भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के संरक्षण आ संवर्धन खातिर सामूहिक प्रयास के जरुरत बा, ताकि ई क्षेत्र आपन पहचान बनवले राखत विकास के ओर बढ़ सके।
(लेखक प्रधान संपादक ‘समाचार विन्दु ‘ साप्ताहिक भोजपुरी समाचार पत्र है।)
