
RKTVNEWS/आरा (भोजपुर)09 अगस्त।9 अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर आज संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत अखिल भारतीय किसान महासभा ने आरा में पूर्वी रेलवे गुमटी से विरोध मार्च निकालकर शहर के विभिन्न मांगों से होते हुए आरा रेलवे स्टेशन परिसर पहुंचा!वहां पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया!सभा का संचालन अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय पार्षद राजू यादव ने किया! विरोध मार्च के दौरान किसानों ने बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत छोड़ो,खेती बचाओ देश बचाओ, किसानों को एमएसपी कानून लागू करो,किसान विरोधी मोदी सरकार मुर्दाबाद,चार श्रम कोड वापस लो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करो,खेती को कारपोरेट के हवाले बेचना बंद,नगर के अंतिम छोर तक पानी की गारंटी करो, किसानों को 200 यूनिट बिजली फ्री देने की गारंटी करो आदि नारे लगा रहे थे!सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश के सभी तबकों के लोग केंद्र सरकार की कॉर्पोरेट,सांप्रदायिक,तानाशाही नीतियों के खिलाफ अपनी दृढ़ और अदम्य लड़ाई को तेज करे ताकि खेत-खेती,खाद्य सुरक्षा,जमीन और लोगों की रोजी-रोटी को कॉर्पोरेट लूट से बचाने के लिए पूरी ताकत लग सके!
आगे वक्ताओं ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार देश के इन बुनियादी उत्पादक वर्गों की आय और आजीविका पर लगातार हमले कर रही है,जिसके कारण यह सरकार भारत में आज तक की सबसे आक्रामक किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी सरकार बन गई है!
पिछले दस वर्षों से यह सरकार देशी-विदेशी कॉर्पोरेट ताकतों के एजेंट के रूप में काम कर रही है,ताकि एयरलाइन, रेलवे, बंदरगाह,बीमा,बैंक,ऊर्जा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और जल, जंगल, जमीन जैसे संसाधनों का निजीकरण किया जा सके और हमारी राष्ट्रीय संपत्ति को लूटा जा सके!
“विकास” के नाम पर मोदी सरकार ने सभी फसलों को एमएसपी@सी-2+50% पर गारंटीशुदा खरीद से मना कर दिया है और इस प्रकार 2014 के आम चुनाव में भाजपा के घोषणापत्र में किए गए वादे का उल्लंघन किया है,जबकि इसने कॉर्पोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 22%-15% की सीमा तक कर दिया है!
आगे वक्ताओं ने कहा कि सब्सिडी वापस लेने से उत्पादन की लागत आसमान छू रही है और लाभकारी आय से किसानों को वंचित किया जा रहा है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा का कॉर्पोरेटीकरण कर दिया गया है — कॉर्पोरेट बीमा कंपनियों ने वर्ष 2017 से आज तक 57000 करोड़ रुपये लूट लिए हैं। इन कारणों से किसान और खेत मजदूर कर्ज के फंदे में फंसे हुए हैं!
वर्ष 2014-22 के दौरान 1,00,474 किसानों ने आत्महत्या की है, इसके बावजूद मोदी सरकार ने किसानों को कर्ज माफी के रूप में एक भी रुपया नहीं दिया है।
लेकिन बड़े कॉर्पोरेट घरानों का 2014-23 के दौरान 14.68 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऋण माफ कर दिया है!
सबसे बढ़कर, 736 शहीदों सहित लाखों किसानों के बलिदान के बाद, जिन्होंने 13 महीने तक दिल्ली की सीमाओं पर लंबी लड़ाई लड़ी है!विरोध मार्च अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव व पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह,क्यामुद्दीन अंसारी,संजय सिंह,सुधीर सिंह,दिलराज प्रीतम,विनोद कुशवाहा,जीतन चौधरी,दुनदुन सिंह,शिवमंगल यादव,अजय गांधी,दिनेश्वर राम,भोला यादव,ददन यादव,भरत सिंह,मुकेश सिंह,जमाल असरफ,अभय सिंह,कुणाल सिंह,आदि कई लोग शामिल थे।

