
भोजपुरी निर्गुण_ गुरु बिना मुरख।
गुरु बिना सब कर होखेला हंसाई।
ज्ञान बिना मुरख के आवेला रोवाई।
आत्मा परमात्मा के बोध गुरु करावे।
मानव तन के उपयोग सब उहे बतावे ।
गुरु बिना कईसे केहू जीनगी बिताई।
गुरु बिना सब कर ………………..।
ध्यान लगे ना कबों थीर मनवा रहे ना।
अनहद नाद के स्वर कनवा सुने ना।
गुरु बिना अकारथ तनवा हाेखेला बिदाई।
गुरु बिना सब कर ……………।
मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा में ढूंढली ।
पत्थर पहाड़ पेड़ जग सारा मो पुजली।
आदि अनादि शिव गुरु हीय बीच पाई।
गुरु बिना सब कर ………………..।
छटपट तड़पत गुरु बिना जग भईल पागल।
सदगुरु संत कबीर नानक रैदास मन लागल।
पीछा लख चौरासी से गुरु ही छोड़ाई।
गुरु बिना सब कर होखेला हंसाई।
गीतकार
श्याम कुंवर भारती ( राजभर)
बोकारो, झारखंड
मॉब. 9955509286
