
बाबू ललन जी की पुत्रवधु हुई शामिल,प्रतिमा पर किया माल्यार्पण।

पुत्रवधु लीला सिंह ने लोगो को किया सम्मानित।
बखोरापुर काली मंदिर की तरफ से भी लोगो को किया गया सम्मानित।
“शास्त्रीय संगीत और बाबू ललन जी ” विषयक गोष्ठी आयोजित।

बाबू ललन जी ने शास्त्रीय संगीत से आरा को बनाया मिनी बनारस।
आरा /भोजपुर(डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)27 जुलाई। आज स्थानीय पटेल बस पड़ाव स्तिथ भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मृदंगवादक शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू ललन जी की जयंती पर परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले आयोजित “शास्त्रीय संगीत और बाबू ललन जी ” विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए संगीत शिक्षक राजेश कुमार राय,अधिवक्ता सुनील कुमार,कवि हरेराम सिंह, डॉ अरविंद कुमार राय,शाहपुर के जन्मेजय ओझा,भोजपुरिया जन मोर्चा के अनिल सिंह,वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक मानव,साहब कुमार,दीपू तिवारी,नगर राम लीला समिति के विष्णु शंकर सहित अन्य वक्ताओं ने कहा की जहां भी शास्त्रीय संगीत की बाते होंगी बाबू ललन जी वहां स्वत आ जाते हैं।

आरा जैसे कस्बाई क्षेत्र को बाबू ललन जी ने अपने जीवनकाल में इतना संगीतमय बना दिया की इसे मिनी बनारस कहा जाने लगा।कई वक्ताओं ने कहा की आज कजरी,ठुमरी,दादरा, आदि या मृदंग जैसे वाद्ययंत्र विलुप्त होते जा रहे है जिसे समाज को जागृत रखने की। आवश्यकता है।संगीत शिक्षक श्री राय का कहना था की शास्त्रीय संगीत लोक भाषा से ही निकलती है। बाबू ललन जी ने इसे जाना समझा तब आरा जैसे कस्बाई क्षेत्र को मिनी बनारस बना दिया।इनकी भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम बाबू ललन जी,बिस्मिल्लाह खां और भिखारी ठाकुर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया।

तत्पश्चात बखोरापुर काली मंदिर के सुनिल सिंह गोपाल के निर्देश मंदिर के प्रशासक राम नाथ चौरसिया ने 21 लोगो को मंदिर की चुनरी ओढ़ा कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जमीरा कोठी की माता जी लीला सिंह ने भी बाबू ललन जी के नाम पर सात लोगो को अंगर्वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।
संचालन शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह एवं आगत अतिथियों का सत्कार बाबू ललन जी के पपौत्र पुष्पेंद्र नारायण सिंह ने किया।
कार्यक्रम में शामिल अन्य लोगो में मुख्य रूप से पप्पू सिंह,व्यास कमलेश पासवान,बाल्मिकी शर्मा,विजय बहादुर सिंह,सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य निर्मल सिंह,पत्रकार कमलेश पांडेय,चित्रकार संजीव सिन्हा,चैन कुमार पासवान आदि प्रमुख थे।

