
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 जुलाई।हमारा समाज चिकित्सकों को धरती का भगवान मानता है, उसी अनुरूप उनको सम्मान भी देता है और उनकी बातों को भगवान का संदेश मानकर पालन भी करता है। अर्थात मरीज अपनी प्राण रक्षा के लिए जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को बिना कोई परवाह किए देने को तैयार हो जाता है और देता भी है। दूसरी तरफ चिकित्सक अपनी प्रतिभा से, अपने सामर्थ्य से अपने टीम और अपने जुगाड़ से दिन हो या रात जान बचाने का भरपूर प्रयास करता है और सफल भी होता है। कभी-कभी अनहोनी घटनाएं भी घट जाती है। जिसको भी मरीज के परिजन यही होना था को कारण मानकर सह भी लेते हैं। कभी-कभी मारपीट और केस मुकदमा की बात आती है। ये भाव है प्रसिद्ध समाजसेवी ,कार्यकर्ता,रेड क्रॉस के आजीवन सदस्य,उपसंरक्षक और राजनीतिक सुझबुझ रखने वाले सरफराज अहमद खान का। सरफराज अहमद ने बताया कि मैंने रोटरी क्लब आरा के राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर सम्मानित कार्यक्रमों को देखा और चिकित्सकों के विचार को भी सुना।बहु अच्छा लगा भी। चिकित्सकों का सम्मान होना चाहिए ,उनके प्रयास को, उनके मनोबल को बढ़ाना सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं का दायित्व भी है।
राष्ट्रीय डॉक्टर डे डॉक्टर बी सी राय के जन्मदिन उनके विचार, दर्शन, सेवा,आजीवन मरीजों की निशुल्क सेवा और सहयोग के लिए याद किया जाता है। जिसके लिए इन्हें भारत रत्न और अनेक सम्मान प्राप्त हुए। लेकिन क्या हम उस महान विभूति के आदर्शों पर चल रहे हैं? उनकी भावनाओं का कद्र कर रहे, या इसे केवल पैसा कमाने का जरिया बना चुके हैं? अपने उद्बोधन में सभी यह माना कि हम डॉक्टरों में भी बहुत गिरावट आई है और समाज का हमारे प्रति विश्वास कम हुआ है बिल्कुल सही है।
मेरा मानना है कि चिकित्सकों को अपनी कमी दूर करने की जरूरत है,ताकि समाज खुद ही पहले जैसा विश्वास करने लगे।
सभी डॉक्टर क्लीनिक मे दवाखाना खोल रखें है,जो सेवा नहीं इनकम है।अगर सेवा है तो अपने मरीजो को विशेष छूट पर दवा उपलब्ध करावे।एक ही मरीज को कई तरह से दोहन करना बंद करे,अगर किसी मरीज का ऑपरेशन है और उससे फीस ले लिया गया तो बाल साफ करने, ड्रेसिंग करने, टांका काटने, जब ड्रेसिंग कराने आए तो पैसा लेने, हुई और हांडी प्लास्टिक का पैसा मांगना है डिप्लास्ट का अलग से पैसा मांगना इंसानियत के खिलाफ लगता है जो नही होना चाहिए। ऑपरेशन में एक बार चार्ज हो गया तब इस ऐसे छोटे-छोटे कार्य के लिए पैसा मरीज को आहत पहुंचाता है। कुछ ऐसे भी चिकित्सक हैं जो मरीज को अपना खून तक देते हैं अपना पैसा देकर इलाज कराते हैं ,बाहर भी भेजते हैं, सहानुभूति दिखाते हुए भद्रता के साथ पेश आते हैं,जिनकी प्रशंसा समाज खुद करता है।
मेरी बातों को बुरा नहीं मानते हुए मेरे डॉक्टर मित्र कुछ सुधार लाने की कोशिश करें तभी समाज की सोच बदलेंगी, चिकित्सक भगवान के रूप है की सत्यता साबित हो सकेगी।
