
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 अक्टूबर।श्री चित्रगुप्त पूजनोत्सव हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो मुख्यतः कायस्थ समाज द्वारा बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिवर्ष मनाया जाता है। यह पर्व यम द्वितीया या भैया दूज के अगले दिन मनाया जाता है।इस बार 23 अक्टूबर 2025 को बड़े धूमधाम से भगवान चित्रगुप्त मंदिर बाबू बाजार में चित्रगुप्त मंदिर प्रबंध समिति द्वारा मनाया जा रहा है। चित्रगुप्त जी महाराज को सृष्टि के लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना गया है जो मनुष्यों के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा रखते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त का जन्म ब्रह्मा जी की काया से हुआ था, इसलिए उनके वंशजों को कायस्थ कहा जाता है।
इस दिन कायस्थ परिवार अपने-अपने घरों और मंदिरों में भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। रंग बिरंगी परिधान,नये कलम, किताब ,कौपी जिसे पूजा करना है साथ लाते हैं।पूरी शुद्धता के साथ पवित्र जल से धोकर लाते हैं।यह ज्ञान और लेखन के प्रतीक हैं। पूजा में भगवान चित्रगुप्त का चित्र एवं मूर्ति स्थापित कर विधिवत आरती, भोग और व्रत कथा की जाती है। कई स्थानों पर इस दिन हिसाब-किताब की नई पुस्तकों का आरंभ भी किया जाता है।
चित्रगुप्त पूजनोत्सव न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह ज्ञान, ईमानदारी और कर्म के महत्व को भी उजागर करता है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि हर मनुष्य को अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए और सदा सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
