आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)17 जून।गंगा दशहरा के अवसर पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् तथा सनातन-सुरसरि सेवा न्यास के संयुक्त तत्त्वावधान में रविवार को फ्रेंड्स कॉलोनी कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता आचार्य भारतभूषण जी महाराज ने की। आरंभ में पंचदेव पूजन तथा भुवनपावनी भगवती गंगा की आराधना की गई।तदुपरांत संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए डॉ सत्यनारायण उपाध्याय ने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की हस्त नक्षत्र युक्त दशमी तिथि को गंगा दशहरा का योग होता है।जिसमें गंगा-स्नान या गंगा का स्मरण-पूजन आदि दस पापों का हरण करने वाला होता है। उन्होंने राजा सगर के अश्वमेध यज्ञ का वर्णन करते हुए गंगा के पृथ्वी पर आने की घटना का रोचक वर्णन किया।
डॉ उपाध्याय ने मैथिल कोकिल विद्यापति जी की गंगा भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि वे श्रृंगार के शिखर से भक्ति के सागर में उतर कर गोते लगाते थे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि गंगा जल साक्षात ब्रह्म द्रव है। स्वयं श्रीमन्नारायण ही गंगा के रूप में प्रकट होकर हम सभी के लौकिक-पारलौकिक भोग-मोक्ष को प्रदान करते हैं तथा प्राणियों को कृतार्थ करते हैं। पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों द्वारा असावधानी या अनजान में हो गये पापों का हरण दशहरा तिथि करती है।आचार्य ने कहा कि एक-एक बूंद पानी को बचाने, प्रतिवर्ष नये पांच-पांच वृक्ष लगाने तथा प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा करने में तत्पर रहने का समय आ गया है। विकास के नाम पर जिस प्रकार की दिशाहीनता तथा सुख-सुविधा के नाम पर जिस प्रकार की जड़ता का आचरण हो रहा है वह पूरी सृष्टि के लिए घातक है।
वन,पर्वत,नदी, गोवंश आदि की रक्षा कर ही मानव सुरक्षित रह सकता है और आने वाली पीढ़ियों का उत्कर्ष हो सकता है। इस विषय में घर-घर में संपर्क कर जल संरक्षण तथा स्वच्छता के लिए अभियान की शुरुआत की गई। अगले दो महीनों तक आरा नगर तथा छः महीनों तक भोजपुर जिला में जनजागरण का अभियान चलाया जाएगा। स्वागत भाषण पं मधेश्वर नाथ पाण्डेय, संचालन कुमार सौरभ और धन्यवाद ज्ञापन नर्वदेश्वर उपाध्याय ने किया। वक्ताओं में जयप्रकाश तिवारी, पं ब्रजकिशोर पांडेय, पं अजय मिश्र, विनोद दूबे आदि प्रमुख थे। जनजागरण अभियान के लिए एक समिति बनाई गई।
