RKTV NEWS/डॉ अजय ओझा,वरिष्ठ पत्रकार 17 मई।शालिग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर है। धार्मिक आधार पर इसका प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है।
शालिग्राम मूलरूप से नेपाल में स्थित दामोदर कुंड से निकलने वाली काली गंडकी नदी से प्राप्त किया जाता है। इसलिए शालिग्राम को गंडकी नंदन भी कहते हैं।
वैष्णव (हिंदू) पवित्र नदी गंडकी में पाए जानेवाला एक गोलाकार, आमतौर पर काले रंग के एमोनोइड (Ammonoid) जीवाश्म को विष्णु के प्रतिनिधि के रूप में पूजते हैं। शालिग्राम भगवान विष्णु का प्रसिद्ध नाम है। जो इन्हें देवी वृंदा के शाप के बाद मिला नाम है।
हिंदू धर्म में शालिग्राम को सालग्राम के रूप में भी जाना जाता है। शालिग्राम का संबंध सालग्राम नामक गांव से भी है। यह गांव नेपाल में गंडकी नामक नदी के किनारे पर स्थित है।
शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग के तो भारत में लाखों मंदिर हैं, लेकिन शालिग्रामजी का एक ही मंदिर है।
हिंदू धर्म में आमतौर पर मानवरूपी धार्मिक मूर्तियों के पूजन की प्रथा है। लेकिन इन मूर्तियों के पहले से भगवान ब्रह्मा को शंख, विष्णु को शालिग्राम और शिवजी को शिवलिंग रूप में ही पूजा जाता था। भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता के 12वें अध्याय के 5वें श्लोक में कहा है…
”जिन लोगों के मन परमात्मा के अप्रत्यक्ष, अवैयक्तिक गुणों से जुड़े होते हैं, उन लोगों के लिए उन्नति बहुत कठिन है। शरीर युक्त जीव को इस अनुशासन में प्रगति करना सदैव मुश्किल होता है।”
शालिग्राम का स्थित….
शालिग्राम का एकमात्र मंदिर नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में स्थित है। यह वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी कठिन है। माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है। पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से जा सकते हैं, यहां से जोमसोम जाना होता है। जोमसोम से मुक्तिनाथ जाने के लिए हेलिकॉप्टर या फ्लाइट ले सकते हैं। सड़क मार्ग से जाने के लिए पोखरा तक कुल 200 कि.मी. की दूरी तय करनी होती है।
शालिग्राम कैसे होती है….
शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र, काली गण्डकी नदी के तट पर पाए जाते हैं। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और सुनहरी आभा युक्त शालिग्राम भी होता है। लेकिन सुनहरा और ज्योतियुक्त शालिग्राम मिलना अत्यंत दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति प्राकृतिक तौर पर बनी होती है।
शालिग्राम का प्रकार….
लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं, जिनमें से 24 प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना जाता है। मान्यता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।
भगवान विष्णु के अवतारों के अनुसार, शालिग्राम यदि गोल है तो वह भगवान विष्णु का गोपाल रूप है। मछली के आकार का शालिग्राम श्रीहरि के मत्स्य अवतार का प्रतीक माना जाता है। यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो इसे विष्णुजी के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक माना जाता है। शालिग्राम पर उभरनेवाले चक्र और रेखाएं विष्णुजी के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण रूप में उनके कुल को इंगित करती हैं।
शालिग्राम पत्थर, हिंदू धर्म में एक प्रमुख पूज्य आवश्यकता है, जो विष्णु के एक अवतार के रूप में जाना जाता है, और यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पत्थर गुणवान होता है और हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
शालिग्राम पत्थर, हिंदू धर्म में एक प्रमुख पूज्य आवश्यकता है, जो विष्णु के एक अवतार के रूप में जाना जाता है, और यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पत्थर गुणवान होता है और हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसका महत्व
1. विष्णु के अवतार के रूप में : शालिग्राम पत्थर को विष्णु के एक अवतार के रूप में माना जाता है, और इसे भगवान विष्णु की पूजा में उपयोग किया जाता है।
2. पूजा और आराधना : शालिग्राम पत्थर को हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसे विष्णु भगवान की पूजा के लिए उपयोग किया जाता है।
3. पवित्रता : इस पत्थर को पवित्र माना जाता है, और इसे अनेक पूजा और समर्पण के लिए प्रयोग किया जाता है।
4. साधना में उपयोग : यह उन लोगों द्वारा भी प्रयोग किया जाता है जो साधना और ध्यान में लगे होते हैं, और इसके माध्यम से अपने आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति करते हैं।
शालीग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर है, जिसका प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है। शालीग्राम आमतौर पर पवित्र नदी की तली या किनारों से एकत्र किया जाता है। शिव भक्त पूजा करने के लिए शिव लिंग के रूप में लगभग गोल या अंडाकार शालिग्राम का उपयोग करते हैं।
कहते हैं कि शालिग्राम में साक्षात भगवान विष्णु समाए हैं. शालिग्राम 33 तरह के होते हैं, जिनमें से 24 को भगवान विष्णु के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है।
