आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 मई। बुधवार को सहजानंद ब्रह्मऋषि महाविद्यालय आरा के हिंदी विभाग द्वारा आदिवासी विमर्श एवं हिंदी साहित्य विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन करने और अतिथियों का सम्मान कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो.मृत्युंजय सिंह, विभागाध्यक्ष हिंदी वीकेएसयू आरा, द्वारा आदिवासी विमर्श और हिंदी साहित्य विषय अपने सारगर्भित विचारों को हमारे बीच रखा। उन्होंने साहित्य की दुनिया को मूल्यों की दुनिया कहा।आदिवासी विमर्श के सैद्धांतिक पक्ष पर बात करते हुए कहा गया कि डॉ.वीर भारत तलवार ने आदिवासी विमर्श को चार श्रेणियां में विभक्त किया है। वहीं जेएनयू दिल्ली में हुए 2013 के सेमिनार में वंदना टेटे द्वारा आदिवासी सिद्धांत प्रस्तुत करते हुए बताया की आदिवासी विमर्श वर्चस्व के प्रतिरोध में आया है।उत्पत्ति के विषय में उन्होंने कहा कि उदारवाद आने के बाद आदिवासी क्षेत्र में जो साहित्य लिखा गया वहीं आदिवासी विमर्श है। आदिवासी विमर्श में आलोचना,व्यंग, आत्मकथा जैसी विधाओं का अभाव है जिसकी पूर्ति होना अति आवश्यक है।
वहीं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो रविंद्र नाथ राय द्वारा आदिवासी विमर्श में कविता के महत्व पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि आदि जाति की लोक साहित्यिक परंपरा बहुत ही समृद्ध परंपरा रही है जिसे संजोकर रखना अति आवश्यक है।
उन्होंने निर्मला पुतुल, जसिंता केरिकेट्ट जैसी कवित्रियों की कविताओं को आधार बनाकर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की संयोजिका सह प्रधानाचार्य डॉक्टर पूनम कुमारी द्वारा स्वागत भाषण एवं स्वरचित कविता पाठ किया गया। उन्होंने आदिवासी जीवन में जल जंगल जमीन के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में शोध छात्रों आनंद कुमार, सौरभ कुमार, संदीप कुमार द्वारा अपने पत्रों का वाचन किया गया। कार्यक्रम मैं आए हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ साधना रावत सहायक आचार्य हिंदी विभाग एस .बी.कॉलेज द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सुदीक्षा शर्मा द्वारा किया गया।

