RK TV News
खबरें
Breaking News

राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर पूरे देश में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं:कुमारी सुनीता सिंह

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 मई। दिशा एक प्रयास की निदेशक कुमारी सुनीता सिंह ने शनिवार को बताया की बाल विवाह,बाल यौन शोषण,बालश्रम आदि के लिए संगठन वर्षों से रोकने के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए आम लोगों में जागरूकता, प्राप्त अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी,पुलिस का सहयोग, महिला हेल्पलाइन नंबर, मदद के लिए महिला थाना का नं,के साथ साथ अन्य सामाजिक संगठनों के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी जा रही है।आज जिला मुख्यालय आरा में विभागीय सदस्यों को इन्होंने बताया की प्रदेश में बाल विवाहों की रोकथाम सुनिश्चित करने के राजस्थान हाई कोर्ट के फौरी आदेश के बाद पूरे देश में इस तरह की आवाजें उठने लगी हैं कि उनके राज्य में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाए जाएं। बिहार के भोजपुर और बक्सर जिलें में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के सहयोगी संगठन दिशा एक प्रयास ने राज्य सरकार से अपील की कि वह भी इस नजीर का अनुसरण करते हुए तत्काल रोक लगाई जाए। अक्सर
अक्षय तृतीया के अवसर पर मंदिर या अन्य स्थानों पर शादियां होती है। यह आदेश ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस’ की जनहित याचिका पर आया है। इन संगठनों ने अपनी याचिका में इस वर्ष 10 मई को अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
न्यायमूर्ति शुभा मेहता और पंकज भंडारी की खंडपीठ ने कहा, “सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से इस बात की रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्र में कितने बाल विवाह हुए और इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयास किए गए।” खंडपीठ का यह आदेश अक्षय तृतीया से महज 10 दिन पहले आया है।
याचियों द्वारा बंद लिफाफे में सौंपी गई अक्षय तृतीया के दिन होने वाले 54 बाल विवाहों की सूची पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को इन विवाहों पर रोक लगाने के लिए ‘बेहद कड़ी नजर’ रखने को कहा है। यद्यपि इस सूची में शामिल नामों में कुछ विवाह पहले ही संपन्न हो चुके हैं लेकिन 46 विवाह अभी होने बाकी हैं।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल विवाह वह घृणित अपराध है जो सर्वत्र व्याप्त है और जिसकी हमारे समाज में स्वीकार्यता है। बाल विवाह के मामलों की जानकारी देने के लिए पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय करने का राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है। पंच व सरपंच जब बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक होंगे। बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पूरी दुनिया के लिए एक सबक हैं और राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।देश में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब पंचायती राज प्रणाली को यह शक्ति दी गई है कि वह सरपंचों को अपने क्षेत्राधिकार में बाल विवाहों को रोकने में विफलता के लिए जवाबदेह ठहरा सके।पूरे देश के जिलाधिकारियों से इसी तरह के कदम उठाने की अपील करते हैं। जमीनी स्तर पर हमारी पहलों ने यह साबित किया है कि बाल विवाह जैसे मुद्दों के समाधान में सामुदायिक भागीदारी सबसे अहम है।यह अदालती आदेश बच्चों की सुरक्षा के लिए समुदायों को,स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है।”

Related posts

दरभंगा:फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में 11 फरवरी को जीविका दीदियों द्वारा विशेष मेगा कैम्प।

rktvnews

उपराष्ट्रपति 21 जनवरी को छत्तीसगढ़ के रायपुर का दौरा करेंगे।

rktvnews

झारखण्ड:मतदान में तेजी लाने के लिए चेन सिस्टम के तहत पीठासीन पदाधिकारी कराएं मतदान : के. रवि कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी

rktvnews

दरभंगा जिला स्थापना दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

rktvnews

भोजपुर :सेक्टर पदाधिकारियो एवं सेक्टर पुलिस पदाधिकारी को दिया गया अंतिम प्रशिक्षण।

rktvnews

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने स्टेट डिज़ास्टर रेस्पॉंस फंड (एसडीआरएफ) के तहत 19 राज्य सरकारों को 6,194.40 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी।

rktvnews

Leave a Comment