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भोपाल:राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर एनआईडी मध्यप्रदेश एवं मानव संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में “धागा एक पहचान : थ्रेड्स ऑफ आइडेंटिटी” का शुभारंभ।

देशभर के 25 से अधिक शिल्पकारों ने प्रस्तुत की भारत की समृद्ध हथकरघा एवं शिल्प परंपरा, प्रदर्शनी, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने किया आकर्षित।

भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद) 7 अगस्त।राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम “धागा एक पहचान : थ्रेड्स ऑफ आइडेंटिटी” का शुभारंभ आज एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर में गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की सहायक संरक्षक डॉ. सुदीपा रॉय द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 25 से अधिक शिल्पकार एवं हस्तशिल्प विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जो भारत की विविध हथकरघा, वस्त्र एवं लोक शिल्प परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के परिचय, दीप प्रज्वलन एवं एनआईडी मध्यप्रदेश की छात्रा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि संभागायुक्त करणवीर शर्मा (आईएएस) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नाबार्ड की सुश्री सी. सरस्वती तथा मेहर बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट, पंजाब के ट्रस्टी एवं अध्यक्ष हसन सिंह मेजी उपस्थित रहे। समारोह में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे तथा एनआईडी मध्यप्रदेश की निदेशक प्रो. विध्या राकेश भी मंचासीन रहीं।

एनआईडी मध्यप्रदेश की निदेशक प्रो. विध्या राकेश ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन शिल्पकारों, विद्यार्थियों, डिज़ाइनरों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने भारतीय शिल्प विरासत के संरक्षण एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य में उसके नए आयाम विकसित करने में डिज़ाइन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे ने अपने संबोधन में संग्रहालय एवं डिज़ाइन संस्थानों के मध्य इस प्रकार के सहयोगात्मक प्रयासों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, प्रलेखन एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी मानव संग्रहालय एवं एनआईडी के मध्य ऐसे संयुक्त कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित किए जाने पर बल दिया, जिससे संग्रहालयों, डिज़ाइन संस्थानों, शिल्पकारों एवं समुदायों के बीच और अधिक सार्थक सहभागिता विकसित हो सके।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुदीपा रॉय ने आयोजन को सफल बनाने में दोनों संस्थानों के निदेशकों के मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “धागा एक पहचान” संग्रहालय, डिज़ाइन शिक्षा, शिल्पकारों एवं समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। एनआईडी मध्यप्रदेश की कार्यक्रम समन्वयक सुश्री श्रुति निगम ने कार्यक्रम की अवधारणा एवं उद्देश्यों से उपस्थितजनों को अवगत कराया तथा बताया कि इसका उद्देश्य शिल्पकारों, डिज़ाइनरों, विद्यार्थियों एवं आमजन के बीच सार्थक सहभागिता विकसित करना है।

विशिष्ट अतिथि सी. सरस्वती ने डिज़ाइन, नवाचार एवं बाज़ार से जुड़ाव के माध्यम से शिल्पकारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं हसन सिंह मेजी ने स्वदेशी आंदोलन, बुनकर एवं वस्त्र के आत्मीय संबंध तथा “वोकल फॉर लोकल” की भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्थानीय शिल्पकारों को सशक्त बनाने में डिज़ाइन शिक्षा की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उद्घाटन सत्र के दौरान एनआईडी मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों ने आकर्षक कथक नृत्य एवं बांसुरी वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके उपरांत अतिथियों एवं सहभागी शिल्पकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के आगामी तीन दिनों की रूपरेखा सुश्री जिज्ञासा द्वारा प्रस्तुत की गई तथा अंत में सुश्री सोनल वंजारे ने आभार प्रदर्शन किया।

उद्घाटन समारोह के पश्चात अतिथियों ने “फर्शनामा : मानव संग्रहालय के आरक्षित संग्रह से कालीन” प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में पारंपरिक कालीन, दरी, चटाई तथा विभिन्न प्रकार की फर्श सज्जा परंपराओं का प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी का विस्तृत परिचय सहायक संरक्षक डॉ. सुदीपा रॉय, सहायक संरक्षक एन. शकमाचा सिंह तथा संग्रहालय सहयोगी आयशा गराबाडू द्वारा कराया गया।

इसके बाद अतिथियों ने शिल्पकार प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों से संवाद किया। कार्यक्रम के अंतर्गत मास्टर शिल्पकारों द्वारा लाइव प्रदर्शन, टफ्टेड रग निर्माण एवं लिप्पन कला की सहभागितापूर्ण कार्यशालाएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों एवं आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “क्राफ्टिंग कन्वर्सेशन : आर्टिज़न्स स्टोरीज़ एंड एक्सपीरियंस” शीर्षक संवाद सत्र में शिल्पकारों ने अपने अनुभव, पारंपरिक ज्ञान एवं शिल्प यात्रा साझा की। कार्यक्रम में जनजातीय नृत्य प्रस्तुति ने भी दर्शकों का मन मोह लिया।

आयोजन के अंतर्गत बंगाली एवं मराठी व्यंजनों के विशेष फूड स्टॉल भी लगाए गए, जिन्हें विद्यार्थियों एवं आगंतुकों ने अत्यंत उत्साह के साथ सराहा। इन स्टॉलों ने भारतीय पाक परंपराओं की विविधता से भी आगंतुकों को परिचित कराया।

इस आयोजन में मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों के शिल्पकार भाग ले रहे हैं। प्रदर्शित शिल्प परंपराओं में कलमकारी, तंगाइल बुनाई, त्रिपुरा वस्त्र, चिकनकारी, कालीन बुनाई, ब्लॉक प्रिंटिंग, आभूषण निर्माण, मधुबनी कला, लकड़ी के खिलौने, लिप्पन कला, टफ्टेड रग निर्माण, फुलकारी, वारेसेओनी साड़ियाँ, चंदेरी एवं पैठणी साड़ियाँ सहित अनेक पारंपरिक शिल्प शामिल हैं।

मानव संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि “धागा एक पहचान : थ्रेड्स ऑफ आइडेंटिटी” का उद्घाटन दिवस विरासत, डिज़ाइन, शिल्प, शिक्षा, पाक परंपरा एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अद्भुत संगम रहा। प्रदर्शनी, शिल्प प्रदर्शन, कार्यशालाओं, शिल्पकार संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से यह आयोजन भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, शिल्पकारों की सृजनशीलता तथा पीढ़ियों से चली आ रही हस्तकला परंपराओं का उत्सव बनकर उभरा।

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