
रांची/झारखंड (मनोज कुमार प्रसाद)07 अगस्त।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार को रांची में आयोजित राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को वन महोत्सव की बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और उसके संरक्षण के संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को महसूस कर रही है। कहीं अत्यधिक वर्षा हो रही है, तो कहीं सूखे की स्थिति है। कहीं भीषण गर्मी पड़ रही है, तो कहीं असामान्य ठंड का सामना करना पड़ रहा है। बादल फटना और भूस्खलन जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। ये सभी संकेत हैं कि प्रकृति हमें लगातार चेतावनी दे रही है।
मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। सड़कें बनें, उद्योग स्थापित हों और शहरों का विस्तार हो, लेकिन यह जल, जंगल और जमीन की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब हम जंगलों में अतिक्रमण करेंगे, तो वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर आना स्वाभाविक है। आज हाथियों का गांवों और शहरों की ओर आना भी प्रकृति के बिगड़ते संतुलन का परिणाम है। इसलिए वन और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जंगलों, समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्णय लिया है कि प्रदेश में ऐसे वृक्षों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो इंसान, पशु-पक्षी और पर्यावरण—तीनों के लिए उपयोगी हों।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल अधिक से अधिक पेड़ लगाना नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों को संरक्षित कर उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी है। वन संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर ही हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, हरा-भरा और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित कर सकते हैं।
