पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 5 अप्रैल। बिहार सहित पूरे देश में रमजान के महीने के आखिरी शुक्रवार को मुसलमान भाइयों ने अलविदा जुम्मे की नमाज अदा की। विदित हो कि 11 अप्रैल को ईद-उल-फितर का त्यौहार है। इस्लाम धर्म में जुम्मा यानी शुक्रवार के दिन की खास अहमियत है। रमजान के पाक महीने मे जुम्मा की अहमियत और बढ़ जाती है। इस्लाम धर्म में अलविदा जुम्मा बेहद महत्वपूर्ण दिन होता है। इसकी खास अहमियत है। रमजान के आखिरी जुम्मे को अलविदा कहा जाता है। इस्लाम धर्म में ऐसा मानना है कि वैसे लोग जो हज करने के काबिल नहीं है, अगर वे जुम्मे के दिन पूरे एहतराम के साथ नमाज अदा करें तो उन्हें हज करने के बराबर ही सवाब मिलता है। रमजान के महीने में हर जुम्मे की अपनी अहमियत है। अलविदा जुम्मा एक अलग ही महत्व रखता है। अलविदा जुम्मा को अरबी में जमात-उल-विदा भी कहा जाता है। भोजपुर जिला के आरा,पीरो,सहार, संदेश, जगदीशपुर, बिहिया,शाहपुर, रानीसागर, बगहीं,टिकठी, लसकरा, सहजौली, बरिसवन, उमरावगंज, भीमपट्टी सहित विभिन्न गाँवों में मुसलमान भाइयों ने विभिन्न मस्जिदों मे अलविदा जुम्मे की नमाज अदा की। शौकत शाह, फिरोज शाह, मुन्ना शाह, इम्तियाज शाह, मो शाहिद अनवर उर्फ सगीर, मो मोख्तार शाह, मो इस्लाम, जन्नत अली सहित बड़ी संख्या में मुसलमान भाइयों ने अलविदा जुम्मे की नमाज अदा की।


