RKTV NEWS/भोपाल (मध्यप्रदेश) 31मार्च। अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा आभासी पटल पर रंगोत्सव का अखिल भारतीय स्तर पर आयोजन किया गया। आयोजन मे देश के विभिन्न प्रांतों के रचनाकारों ने होली के सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार गोकुल सोनी ने की।
प्रारंभ में संस्था की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य देते हुए देश के विभिन्न भागों में मनाई जाने वाली होली की विशेषताओं का जिक्र करते हुए नीरज जी का गीत सुनाया।
“हमारी ज़िन्दगी यूँ तो है इक काँटों भरा जंगल,
अगर लगने लगे मधुबन, समझ लेना कि होली है।”
25 रचनाकारों ने लोकगीत, दोहे ,छंद स्वरचित स्तरीय होली गीतों की प्रस्तुति दी। मुंबई से अमर त्रिपाठी ने अपनी होली पर लिखी गजल सुनाई। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश आदि प्रांतों से और स्थानीय रचनाकार अमर त्रिपाठी, रानी, शब्द सुल्ताना, शोभा शर्मा, सुरेश पटवा, महिमा वर्मा, नविता जौहरी, डा . बृज भूषण मिश्र, उषा सक्सेना, ऊषा सोनी और अन्य रचनाकार शामिल हुए।
गोकुल सोनी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि बसंत और होली में प्रकृति खुलकर मुस्कराती है। यह त्यौहार गरीब, अमीर, छोटे बड़े सभी को भेदभाव भूलने की प्रेरणा देता है, सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
सभी की रचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने सार्थक विश्लेषण कियानेवम अपनी कुछ बेहतरीन रचनाएं प्रस्तुत की।
अक्षरा की संपादक जया केतकी शर्मा ने कार्यक्रम का बेहतरीन, सफल संचालन किया।

