
शहर का हाशिया !
निरंतर ऊँचे होते मकान
चकाचौंध वाले बढ़ते दूकान
शहर की चमक बढ़ा रहे
टूट-फूट गई हैं सड़कें
जैसे किसी मेहनतकश के तलवों में
हो गहरी फटी रेखाओं का जाल।
शहर असमय बूढ़ाई औरत है
जिस पर मेकअप थोप थोप
गढ़ा जा रहा जवानी का भ्रम
रिक्शा वाला अक्सर
उतार लेता है रिक्शा
मुख्य सड़क की बगल
और सरपट भागता है गंतव्य की ओर।
पैरों के दबाव से चिकने मिट्टी के फुटपाथ पर
तेज चलता है रिक्शा
हाशिया हथिया लेता है इस तरह
मुख्य मार्ग का श्रेय
एक दिन ऐसा भी होगा
मुख्य सड़क दम तोड़ देगी
और फुटपाथ बन जाएगा अंतिम विकल्प



