
होली के पद्य..!
गेहुँआ, मटरा , चउरा , मसुरी बनिया के लगे बिन मोल बिकाई ।
बबुआ बुचिया ठुनुकी असवो बिन टाका ना जोड़ा-जामा सियाई ।।
कुल्हि रंग बेरंगा बेढंगा लगे बेगुलाल जे गाले प गोबर मलाई।
गई झारि-बहार कोरोना कली लेके प्रीत के रीत सभे से पराई।।
घर छोड़ी बिना संगी-साथिन के खोरिया-खोरिया गंजहा भकुआई।
फगुआ, लगुआ-भगुआ बनि आवे त अइसे में का करि लोग लुगाई।।
घरे काटे मजा अब राम राजा, ढोढ़ी टोवे ले राधा के किसन कन्हाई।
बा किसाने के पूत के बुता कहाँ, बाते-बाते में कइसे के होरी मनाई ।।



