पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 20 मार्च। राजधानी पटना सहित सूबे मे बेमौसम बरसात से जहाँ एक तरफ लोग परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ किसान हताश हैं। पटना सहित पूरे राज्य में दो दिनों से गरज के साथ छींटे पड़ रहे हैं। बिन मौसम बरसात ने लोगों को परेशान कर दिया है। लोगों को भींग कर अपने काम करने पड़ रहे हैं। बारिश में भीगने से लोगों की तबीयत भी गड़बड़ होने लगी है। बारिश और हवा के चलते ठंड बढ़ गई है। कुछ दिन पहले तक लोगों ने स्वेटर और ऊनी वस्त्र से निजात पा लिया था। दिन में लोगों को ऊनी वस्त्र पहनने की जरूरत नहीं पड़ती थी। सिर्फ सुबह और शाम हल्का ऊनी वस्त्र की जरूरत पड़ती थी। परंतु इस बारिश और हवा ने एकबारगी ठंढ बढा दी है। लोग एक बार फिर स्वेटर और ऊनी वस्त्र पहनने पर मजबूर हो गए हैं। राजधानी पटना के विभिन्न मोहल्लों सहित अन्य जगहों पर जल जमाव और कीचड़ हो गया है।
बारिश से रबी फसल चना, मसूर, मटर, खेसारी, तीसी, सरसों, अरहर बर्बादी के कगार पर है। चना, मसूर, खेसारी, मटर, सरसों की फसल पक कर तैयार है। कई किसानों ने अपने इन फसलों को काटकर खलिहान में रखा है। जबकि कई किसानों की पकी हुई फसल खेतों में लगी हुई है। अरहर की फसल भी अब पकने के कगार पर है। बिन मौसम बरसात से इन फसलों को काफी क्षति हुई है। खलिहान में रखे इन फसलों के बोझे भींग चुके हैं। खेतों में पकी हुई खड़ी फसल भी भींगने से बर्बादी के कगार पर है। इस बारिश से किसानों के माथे पर बल पड़ चुका है। उनकी मेहनत बर्बादी के कगार पर आ चुकी है। बारिश से फसल का उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। किसान कलेजे पर हाथ रखे हुए हैं। हालांकि गेहूॅ की फसल को कुछ फायदा होने की उम्मीद है। गेहूँ की फसल भी अब तैयार होने लगी है। गेहूॅ की कुछ फसल हरी है तो वहीं कुछ फसल पकने लगी है। गेहूँ की हरी फसल को इस बारिश का कुछ फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर देखा जाय तो इस बारिश से फायदा कम घाटा ज्यादा है। भोजपुरी में एक कहावत है – “अगहन हून पूस दून, माघ सवाई अउर फागुन में घरहूॅ से गंवाई”। इस कहावत का अर्थ है कि अगर अगहन महीने में बारिश होती है तो रबी फसल के उत्पादन में अनगिनत वृद्धि होती है। पूस महीने की बारिश से रबी फसल दोगुनी होती है। माघ महीने की बारिश से फसल मे सवाई वृद्धि होती है। वहीं फाल्गुन महीने में अगर बारिश होती है तो घर से भी फसल गंवाना पड़ता है। फाल्गुन महीने की बारिश से रबी फसल बर्बाद होती है। फाल्गुन महीने में हुए इस बारिश से फसल में बर्बादी की आशंका व्यक्त की जा रही है। इससे किसानों को घाटा होने की आशंका जताई जा रही है।


