
भावना..!
शुद्ध भावना चित्त सजाये ।
सबको समता से अपनाये ।।
भावनाएं हो जिसकी जैसी ।
दृष्टिकोण धाराएँ तैसी ।।
सुख दुख सब अनुभव कर पाते ।
भाव सजे सब रिश्ते नाते ।।
भाव श्रेष्ठ अति सबसे कहते।
भावों के भूखे प्रभु रहते ।।
निर्मल हिय सुन्दरता जाने ।
सद्भावों से कर्म सुहाने ।।
दुष्कर्म दुर्भाव हर तजिए ।
भक्ति भाव से राघव भजिए ।
दुष्कृत्य दुर्भाव के जरिए ।
भावनाएं आहत मत करिए ।।
मृदुल भावनाएं रख सारे ।
शुद्ध भाव मानुष प्रभु-प्यारे ।।
(साभार शब्दों की सरिता मंच)

