रांची/झारखण्ड (डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार) 2 जनवरी।राजभवन में एक समारोह में चंपई सोरेन ने राज्य के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. चंपई सोरेन के साथ ही कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली.
इनके साथ राजद के सत्यानंद भोक्ता को भी राज्यपाल ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई. बता दें कि चंपई और गठबंधन के नेताओं ने गुरुवार को राज्यपाल सीपी राधाकृष्ण के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इसके बार राज्यपाल ने उन्हें राज्य में नई सरकार बनाने का न्योता दिया था. चंपई को 10 दिन के भीतर बहुमत साबित करना होगा।
यहां यह भी बता दें कि राज्यपाल के न्योते से पहले भी चंपई सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया था. चंपई सोरेन का दावा है कि उनके साथ 47 विधायकों का समर्थन है. विधायक दल का नेता मनोनीत होने के बाद उन्होंने आदिवासी और गरीबों के हक में लड़ाई जारी रखने की बात कही।
बता दें कि झारखंड में नए सीएम बनाने की कोशिश तब शुरू हुई, जब कथित जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था. हेमंत सोरेन ने पहले राजभवन जाकर सीएम पद से इस्तीफा दिया, उसके बाद ईडी के गिरफ्तार करने वाले मैमो पर साइन की।
हेमंत सोरेन के ईडी कस्टडी में जाने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा और गठबंधन में शामिल दलों ने चंपई सोरेन को विधायक दल के नेता के रूप में चुना था. इसके बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था.
कौन हैं चंपई सोरेन
68 वर्षीय चंपई सोरेन का जन्म 1 नवंबर 1956 को सरायकेला खरसावां में हुआ. आदिवासी परिवार में पले-बढ़े चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्यों में से एक माने जाते हैं.1995 में पहली बार चंपई सोरेन बिहार विधानसभा में विधायक चुनकर पहुंचे।
सरायकेला खरसावां के सीट से विधानसभा में जाने के बाद लगातार चंपई सोरेन ने अपना झंडा बुलंद रखा है।
चंपई सोरेन को एक बार चुनावी हार का भी सामना करना पड़ा है. इसके उपरांत वर्ष 1995 के बाद से लगातार वो विधायक रहे हैं. वर्ष 2000 को छोड़ दिया जाए तो 2005 के वर्ष में भी सरायकेला खरसावां से चंपई सोरेन विधायक चुने गए और लगातार 2019 तक वह विधायक रहे हैं।
चंपई सोरेन द्वारा चुनाव आयोग में जमा की गई जानकारी के मुताबिक, चंपई सोरेन ने 1974 ने मैट्रिक की परीक्षा पास की. आदिवासी परिवार में पले बढ़े चंपई सोरेन की 2019 के लोकसभा चुनाव में चल संपत्ति 2 करोड़ से अधिक की है. हालांकि, हर चुनावी वर्षों में उनकी संपत्ति में वृद्धि हुई है. वर्ष 2009 के चुनाव में उन्होंने अपनी संपत्ति 45 लाख से अधिक बताई की वहीं, झारखंड विधानसभा के 2014 के चुनाव में ये संपत्ति 1 करोड़ से अधिक की थी।

