आरा/भोजपुर 07 दिसंबर।लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी की ओर से आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का उद्घाटन वरिष्ठ संगीतकार चंद्रमोहन ओझा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में इस सांगीतिक सभा को संबोधित करते हुये चंद्रमोहन ओझा ने कहा कि संगीत समाज को जोड़ने क़ा एक सशक्त मार्ग है। पूरे विश्व मे संगीत एक ही है जो सातों स्वर की अभिव्यक्ति करता है। जिस प्रकार ईश्वर एक है रूप अनेक उसी प्रकार अलग अलग शैलियां होने के बावजूद संगीत एक है। दुनिया भर में प्रचलित संगीत क़ा आधार सात स्वर ही हैं। संगीत में कोई भेद भाव नही है बल्कि इसमें हर धर्म व जाति के लोग एकाकार होकर स्वर लय व ताल मे मग्न हो जाते हैं। इस अवसर पर प्रमुख कलाकार श्रेया पाण्डेय ने राग भीमपलासी में झपताल विलंबित की बंदिश “नार नवेली चली अकेली पनघटवा” तीनताल मध्य लय की बंदिश ” भरन गई यमुना के तट मैं गगरियाँ” एकताल द्रुत की बंदिश “इतनी अरज मोरी सुनहूं सांवरियां” प्रस्तुत कर समां बांधा। वहीं श्रेया ने राग खमाज में ठुमरी “सैंया गये परदेश सखी री” व दादरा ” मोरे कान्हा को कोई मत देखो नजरिया लग जाएगी” व “प्रेम मुदित मन से बोलो राम राम” प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। युवा गायिका श्रेया की मधुर आवाज, दानेदार तान व गायिकी के अंदाज ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया।हारमोनियम पर नीतीश पाण्डेय व तबले पर गुरु बक्शी विकास ने संगत किया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन संयोजक अमित कुमार ने किया। इस अवसर पर कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव प्रोफेसर विश्वनाथ राय,दिनेश्वर प्रसाद, राणा प्रताप सिन्हा , तबला वादक कृष्ण कान्त मानस ,महंत रामाशीष दास, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’ समेत कई संगीत रसिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।


