नई दिल्ली/01 फरवरी।पवित्र शहर अयोध्या के लिए हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और तीर्थयात्रियों के आगमन को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नागरिक उड्डयन तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल (डॉ) वीके सिंह (सेवानिवृत्त) की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश के अयोध्या के लिए 8 नए उड़ान मार्गों का वर्चूअली माध्यम से उद्घाटन किया।
नए उड़ान मार्ग अयोध्या को दिल्ली, चेन्नई, अहमदाबाद, जयपुर, पटना, दरभंगा, मुंबई और बेंगलुरु से जोड़ेंगे।
हाल ही में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से उत्पन्न अपार मांग ने अयोध्या की पर्यटन क्षमता को बढ़ाया है और आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।
अयोध्या एयरपोर्ट राम मंदिर से जुड़ी अपनी संस्कृति को दर्शाता है
इस अवसर पर श्री सिंधिया ने कहा, ”अयोध्या कोई साधारण गंतव्य नहीं है। दुनिया के कोने-कोने से भगवान राम के भक्तों की आस्था और श्रद्धा इससे जुड़ी हुई है। हवाई अड्डा आगंतुक के लिए शहर का पहला परिचय है। यही कारण है कि महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्याधाम को रामायण की कहानियों से चित्रित कलाकृति के साथ अपनी संस्कृति को प्रतिबिंबित करने के लिए विकसित किया गया है।
श्री सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में परिचालित हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी होकर पांच से दस हो गयी है। पांच और हवाई अड्डे जल्द ही चालू हो जाएंगे और साल के अंत तक राज्य में हवाई अड्डों की कुल संख्या 16 हो जाएगी जिसमें विश्व स्तरीय जेवर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा भी शामिल होगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि ऐसी कोई विमान सेवा नहीं होगी, जो अयोध्या से संचालित नहीं होगी।
स्पाइस जेट इन मार्गों पर निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार परिचालन करेगा:

दिसंबर 2023 में, अयोध्याधाम में महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण 350 करोड़ रुपये की लागत से किया गया, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की गरिमामयी उपस्थिति में किया।
आज के कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में संसद सदस्य लल्लू सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल थे।

