
उसके जैसा कैसे हो सकता कोई ?
बच्चों के बीच होने से
कोई बच्चा कैसे हो जाएगा मास्साब !
ऐसा होता तो पचास पार क्यों करते
ऐसा होता तो भौंहें क्यों तनी होती हर पल
क्यों वक्त लग जाता मुस्कुराते-मुस्कुराते अक्सर
देखो, देखो मास्साब!
कोई स्कूल नहीं आपका
यह तो धड़s..धड़s..धड़s..पोंss..करती हुई रेल है
अम्मा के मोबाइल पर झपट्टा पर झपट्टा
मार रहा उसका उदंत लाड़ला
कोई शब्द हो तो आँक लो
पल-पल बदलते उसके मुखमंडल को
देखो, कैसे मुँह बिदका रहा…
और यह लो,
उसकी अम्मा घूम गई पीछे
वह गोद में जा समाया
और अब सिर पर झीने दोपट्टे की ओट
यह सीट तो उसकी अपनी रिजर्व सीट है गुरु
लो, अम्मा तो लेट गई अब
आँखें भी मुद गईं
गर्रss ..गर्रss..यह क्या
यह क्या जता रहा भला
सुनो! कैसे ललकार रहा
माद से निकल आया एक सिंह शिशु
कि माँ का दूध पीया है तो…
बच्चा , वह शिशु
जिसके पास शब्दों की कोई औकात नहीं
जिसके पास रोने, हँसने , इठलाने
और शेर की भाँति गुर्राने के अपने मजे हैंं
जिसके पास हर वक्त बिछी हुई एक माँ है
जिसके पास जमीन पर लोट कर
सीधे बिस्तर पर चढ़ आने की
मनाही नहीं कोई
भेद-अभेद, ज्ञेय-अज्ञेय सबको
खींच लेने में समर्थ
भला उसके जैसा कैसे हो सकता कोई ?
सुमन कुमार सिंह(आरा) संपर्क : 8051513170

