समस्तीपुर/बिहार 23 दिसंबर।दु:खद है कि मिथिला राज्य की चर्चा तो मिथिलावासी ज़ोर -शोर से उठा रहे हैं, लेकिन मिथिला की विरासत के संरक्षण के मुद्दे पर वे उदासीन हैं।उक्त बातें आज भारत सरकार में योजना आयोग,अब नीति आयोग में दिव्यांग सशक्तिकरण समिति के पूर्व सदस्य डॉ परमानन्द लाभ ने कही।
डॉ लाभ आज अचानक वाचस्पतिनगर, अंधराठाढ़ी, मधुबनी पहुंचे और भामति-वाचस्पति स्थल की दु: स्थिति देखकर हतप्रभ हो गए। वैसे तो यह बिहार सरकार के द्वारा राजकीय स्थल घोषित है, लेकिन धरातल पर सरकार अब तक कुछ भी नहीं कर पाई है।
मौके पर उपस्थित स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा ही इस स्थल की येन-केन-प्रकारेण वजूदगी अक्षुण्ण है।
मौके पर उपस्थित भामती-वाचस्पति स्मारक निर्माण समिति के सचिव प्रो काशीनाथ झा और कोषाध्यक्ष नरेंद्र झा ने डॉ लाभ को निर्माण समिति द्वारा स्थल की संरक्षा व संवर्धन के लिए किए गए कामों से अवगत कराया। यहां एक भव्य सरस्वती मंदिर ग्रामीणों के सहयोग से बनाया जा रहा है। डॉ लाभ ने विद्या वाचस्पति की सुन्दर प्रतिमा का भी दर्शन किया, लेकिन यहां स्थित पुस्तकालय में एक पुस्तक नहीं रहने पर अफशोस जाहिर किया। मौके पर उपस्थित लोगों को स्मारक स्थल के विकास में हर तरह के सहयोग का भरोसा दिलाया। प्रो काशीनाथ झा ने डॉ लाभ को राजकीय कोष से प्रकाशित “भामती” पत्रिका भी भेंट की।
मिथिला रामायण के प्रणेता कवीश्वर चंदा झा की प्रतिमा को भी उन्होंने एक संस्कृत स्कूलनुमा परिसर में धूल फांकते देखा और उसपर माल्यार्पण किया।
इसी क्रम में डॉ लाभ अयाची जन्मस्थली,अयाचीनगर, सरिसबपाही भी गए और वहां की दैयनीय स्थिति देखकर हतप्रभ रह गए। उन्होंने बताया की डीह पर बकरियां चर रही थी और उपले पड़े थे।
उन्होंने कहा की विद्या वाचस्पति और अयाची सदृश पूर्वजों पर जो मिथिला आज भी गौरवान्वित हो रही है।उसकी यह स्थिति मिथिलावासियों के लिए शर्मनाक है। उन्होंने सरकार से भी इस ओर ध्यान देने की बात कही।
