आरा/भोजपुर 23 दिसंबर। श्री राधा कृष्ण परिवार के तत्वाधान में चल रहे स्थानीय कृषि भवन परिसर में भागवत कथा का समापन।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए आयोजन समिति के वरीय सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता सह पूर्व निगम पार्षद डॉ० जितेन्द्र शुक्ल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया की भागवत कथा वाचन करते हुए आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री ने कहा की भागवत का उद्देश्य बहुजन हिताय बहुजन सुखाएं , शांति , सद्भाव, प्रेम भाईचारा का संदेश देना है।भागवत का संदेश चरित्र के निर्माण में भी सहायक होता है। भागवत कथा न्याय के साथ धर्मपरायण व्यवस्था को सामाजिक समरसता के साथ जीवन को जीने की कला भी सिखाता है। शास्त्री जी ने अपने ज्ञान उद्गार में कहा की यौवन हमेशा अंधा होता है बुढ़ापा लंगड़ा होता है । बुढ़ापा चलने में अक्षम है यौवन देखने में।आज समय है की अंधा लंगड़े को कन्धे पर बिठाएं अन्यथा युवा पीढ़ी दिग्भ्रमित होगी। बुजुर्गो का अनुभव और युवा पीढ़ी की शक्ति से समाज का सर्वांगीण विकास होगा अन्यथा इस समाज को कोई बर्बादी से नहीं बचा सकता है । बुजुर्ग और युवा का समन्वय बेहतर विकल्प है लेकिन आज का युवा इससे विमुख होते जा रहा है । पश्चिम सभ्यता का असर यह है कि युवा पीढ़ी में न पिता में पिता , न मां में मां , न बहन में बहन दिखाई दे रही है। यह पश्चिमी सभ्यता देश को रसातल की ओर ले जा रही है । जबकि इसके उल्ट पश्चिमी सभ्यता भारतीय सभ्यता को अपनाकर अपना सर्वांगीण उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रही है।उन्होंने कहा की इस तरह का धार्मिक आयोजन समाज को दशा और दिशा प्रदान करने में कारगर कदम साबित होगा । श्री मद्भागवत कथा का समापन भागवत पुजन , व्यासपीठ पुजन , ब्राह्मण पूजन,एवं प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आशीर्वाद सम्मान के साथ रात्रि दस बजे भव्य भंडार और पुरे धार्मिक हर्षोल्लास से संपन्न हुआ।
समापन के पश्चात परम आदरणीय गुरुदेव पंडित अजयकृष्ण शास्त्री जी महाराज अपने पूरे सहयोगीयों के साथ मथुरा-वृंदावन के लिए प्रस्थान कर गए।
previous post
