सदगुरु चरण सेवा,परमात्मा की प्रेमाभक्ति और प्राणी मात्र से प्रेम ये तीन सूत्र संसार सागर से तरने के है उपाय:आचार्य
आरा /भोजपुर 20 दिसंबर।श्री राधा कृष्ण परिवार आरा के तत्वाधान में कृषि विज्ञान केंद्र स्काडा में चल रहे भागवत कथा के पांचवे दिन व्यास पीठ के पूजन के उपरांत परम श्रद्धेय आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने भागवत कथा का विधिवत रूप से वर्णन किया एवं आगे प्रवचन के माध्यम से आचार्य जी ने कहां कि आज की कथा महाराश एवं उद्धव चरित्र की है। महाराश में गोपी एवं कृष्ण का मिलन जीव परमात्मा का मिलन है , प्राणी परमात्मा से विशुद्ध प्रेम करें तो परमात्मा स्वयं अपने पास बुलाते हैं तथा जिन रसों की चाहत में प्राणी जीवन में अनेकों पाप करके जन्म मरण के दलदल में फंस जाता है वे रस परमात्मा की प्रेमा भक्ति करने पर अनायास ही प्राप्त हो जाती है क्योंकि महाराश का अर्थ ही ( रसो वै स: ) है। संयोग और वियोग, दुःख और सुख जीवन रुपी नदी के दो किनारे है। इसमें जलधारा की तरह हम सबकों चलना है , उद्धव चरित्र इसी बात का संकेत करता है अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ही अवस्था में हमको दृढ़ रहते हुए उस परमात्मा कि यादों को हरपल जीवंत रखना है इसके लिए अपने अंदर के संसार के स्थान पर परमात्मा को बिठाना होगा क्योंकि मनुष्य के जीवन में वाह्य संसार से कोई भी हानि नहीं है। जितनी भी हानि होती है वह भीतर के संसार से होती है । इस भीतर के संसार को निकालना सदगुरु के बिना संभव नहीं है इसलिए सदगुरु की चरण सेवा एवं परमात्मा कि प्रेमा भक्ति और प्राणी मात्र से प्रेम, यह तीन सूत्र संसार सागर से तरने के मुख्य उपाय है । गुरु सेवा और परमात्मा की भक्ति से मन निर्मल और पवित्र रहता है । जब प्राणी का मन निर्मल और पवित्र होगा तो वह हर असंभव काम को भी संभव बना देता है ।
वही हजारों की संख्या में भागवत कथा को हर रोज कथा सुनने आ रहे हैं आशय की जानकारी आयोजन समिती के वरिष्ठ सदस्य पूर्व वार्ड पार्षद डॉ जितेंद्र शुक्ला ने दी उपस्थित लोगों में नीतू जी , राजेश जी , श्याम सुन्दर ओझा , आचार्य अवधेश वशिष्ठ , प्रमोद पाठक, अजय जी , सुरेश जी , राजेश जी ,उपेन्द्र जी , हरिओम जी , लोकेश जी , उर्मिला चौधरी , आशा देवी , पुजा देवी , सुनीता देवी , ललिता देवी , अरुण पाठक , बेबी दुबे , प्रभा देवी , राजेश कुमार जोगाड़ी , लक्ष्मी दुबे , शंभु सिन्हा , सुनील कुमार सहित हजारों भागवत प्रेमी कथा प्रेमी उपस्थित थे।


सदगुरु चरण सेवा,परमात्मा की प्रेमाभक्ति और प्राणी मात्र से प्रेम ये तीन सूत्र संसार सागर से तरने के है उपाय:आचार्य