राजकुमारी गौरवी कुमारी रहीं उपस्थित
अब लगातार हर वर्ष किया जायेगा जयगढ़ फेस्टिवल का आयोजन।
जयपुर/ राजस्थान (डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार) 13 दिसंबर।पर्यटन को बढ़ावा देने और जयगढ़ फोर्ट के 40 गौरवशाली वर्ष पूरे होने की खुशी में “द जयगढ़ फेस्टिवल“ का आयोजन किया गया। यह अपनी तरह का पहला और अनूठा फेस्टिवल है।
40 साल पहले आज ही के दिन जयगढ फोर्ट को पर्यटकों के लिए पर्यटन भ्रमण के लिए खोला गया था। यह अपनी तरह का पहला और अनूठा फेस्टिवल है।
उद्घाटन महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह द्वारा हुआ
“द जयगढ़ फेस्टिवल” का आयोजन शहर की विरासत, कला और शिल्प के संरक्षण और प्रोत्साहन देने के उदेश्य के लिए किया जा रहा है। फेस्टिवल का उद्घाटन जयपुर पूर्व राजघराने के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रिसेंस गौरवी कुमारी भी कार्यक्रम में मौजूद रही। उद्घाटन के बाद सुभट निवास में जयपुर घराने के कथक नृत्य और बांसुरी वादन की प्रस्तुति हुई।
फेस्टिवल एक पहल
फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महाराजा पद्मनाभ सिंह ने कहा – जयपुर शहर अपनी संस्कृति और इतिहास के लिए विश्व विख्यात है। मुझे बहुत प्रसन्नता और गर्व हो रहा है कि जयगढ़ फोर्ट के 40 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाने के लिए आज जयगढ़ फेस्टिवल की शुरूआत की गई है। जयगढ़ फोर्ट हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को दर्शाता है। यह फेस्टिवल एक पहल है. जिसके माध्यम से हम जयगढ़ की स्थापत्य विरासत, कछावा इतिहास, राजस्थान की संगीत परंपराओं और जीवंत लोक संस्कृति से लोगों को रूबरू कराने का प्रयास कर रहे हैं।
फिल्म ‘मीन राग’ की स्क्रीनिंग
ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के बारे में जानकारी लेना है। इस महोत्सव में वास्तुकला, इतिहास, कला,तथा अन्य विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा और बातचीत हुई। इसके साथ ही एक उत्सव बाज़ार भी लगा था। फेस्टिवल में फिल्म निर्माता सुरुचि शर्मा की फिल्म ‘मीन राग’ की स्क्रीनिंग भी हुई। कार्यक्रम में सरकार, वायुसेना, सेना आदि सहयोगियों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
जयगढ़ फेस्टिवल में राजस्थानी कवियों ने सुंदर काव्य पाठ से बांधा समां
प्रतिष्ठित जयगढ़ फोर्ट में आयोजित दो दिवसीय द जयगढ़ फेस्टिवल का रविवार को उत्साह और उमंग के साथ समापन हुआ। फेस्टिवल के समापन समारोह की शुरूआत ढुंढाड़ी कवि सम्मेलन, लोक नृत्य प्रस्तुतियों और बांसुरी वादन के साथ हुई। इस अवसर पर सभी शिल्पकारों को स्मृति चिन्ह व कार्यशाला के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
ढुंढाड़ी भाषा को प्रोत्साहन देने के उदेश्य से कवि सम्मेलन में कवियों द्वारा काव्य पाठ की सुंदर प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में राजस्थान के जाने-माने कवियों ने हिस्सा लिया, इनमें गोपीनाथ गोपेश, कल्याण सिंह शेखावत, प्रह्लाद कुमावत, सुशीला शर्मा, किशोर पारीक, भगवान सहाय पारीक, रितेश शर्मा पथिक, भवानी सिंह राठौड़, अभिलाषा पारीक, आमना राजावत, वेद प्रकाश दाधीच, सुशील गुप्ता ने काव्य पाठ किया। आयोजन का संचालन शोभा चंदर ने किया। इसके साथ ही ढुंढाड़ी भाषा संगोष्ठी में साहित्यकार इतिहासकार जितेन्द्र सिंह ने जयगढ़ निर्माण पर प्रकाश डाला। फेस्टिवल के दौरान बांसुरी वादन, घूमर सहित अन्य राजस्थानी लोक प्रस्तुतियां भी हुई।
कत्थक नृत्य (जयपुर घराना) और कार्यशाला का हुआ आयोजन
समारोह में कत्थक नृत्य (जयपुर घराना) की भी खूबसूरत प्रस्तुति हुई। जयपुर की सुप्रसिद्ध कत्थक गुरु डॉ ज्योति भारती की शिष्याओं सुश्री दीपम, चारु, संगीता, मोनिका एवं सरस्वती की खूबसूरत प्रस्तुति ने समारोह में चार चांद लगा दिया। इस अवसर पर कत्थक नृत्य के कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में राजशक्ति, अदिति, उषा, हर्षिता, जाह्नवी, रक्षिता आदि ने भाग लिया और जयपुर घराने के कत्थक नृत्य की बारिकियों को समझा। सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया गया।
गौरतलब है कि पर्यटन स्थल के रूप में जयगढ़ फोर्ट के 40 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाने के लिए पहली बार इस अनूठे फेस्टिवल का आयोजन किया गया था। अब इस फेस्टिवल का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाएगा। फेस्टिवल का समापन लोक प्रस्तुतियां, लघु चित्रकला, ब्लॉक प्रिंटिंग आदि विभिन्न कार्यशालाओं के प्रतिभागियों, शिल्पकारों और कवियों के सम्मान के साथ हुआ।
कार्यकारी ट्रस्टी, एमएसएमएस द्वितीय संग्रहालय, रमा दत्त और सिटी पैलेस के राजगुरू सुबोध चंद्र शर्मा ने सभी का सम्मान किया। समारोह का संचालन सिटी पैलेस के ओएसडी रामू रामदेव ने किया। इसके पश्चात दिन में एक कला प्रदर्शनी और फेस्टिवल बाज़ार का भी आयोजन हुआ। इस दो दिवसीय फेस्टिवल में बड़ी संख्या में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र, शिक्षाविद, कलाकार, कला प्रेमी, संगीत प्रेमी, इतिहास प्रेमी, वास्तुकला प्रेमी, शॉपर्स, संस्कृतिकर्मी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हुए।

