पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 07 दिसम्बर। बूंदाबांदी और बारिश ने पटना सहित बिहार के कई जिलों को प्रभावित किया है। इसका असर कृषि कार्य पर पड़ा है। पिछले दो-तीन दिनों से आकाश में मेघों की हलचल हो रही थी। उमङ-घुमङ रहे बादल और सूर्य के बीच लुका-छिपी का खेल चल रहा था। कल 6 दिसंबर 2023 से बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ जो रात तक चला। आज 7 दिसंबर 2023 को सुबह से ही आकाश में छाये काले- कजरारे बादल हरकत में आ गए। पूर्वाहन से ही अच्छी बूंदाबांदी शुरू हुई और बारिश का रूप ले लिया। ठंडी हवा ने ठंड को बढ़ा दिया है। बारिश के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए।
बारिश के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो गया है। किसानों को धान फसल की कटनी और दौनी को बंद करना पड़ा है। खेतों में खङी धान की तैयार फसल तथा खलिहानों में रखे धान के बोझे भींग गये हैं। इससे धान के दौनी का कार्य प्रभावित हो गया है। बारिश के कारण गेहूॅ की बुवाई का काम भी थप पड़ गया है। इससे किसानों में मायूसी है। बारिश से गेहूँ की बुआई में भी विलंब होने की बात किसानों द्वारा कही जा रही है। गेहूँ की बुआई का आदर्श समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर है।
धान की रोपनी के समय कम बारिश होने के कारण धान की रोपनी विलंब से हुई। जिससे धान की कटनी में विलंब हुआ। अभी किसान धान की तैयार फसल काट ही रहे हैं कि इस बारिश ने और विलंब कर दिया। बारिश ने रही सही कसर पूरी कर दी। गेहूँ की बुआई में और विलंब होने की संभावना जताई जा रही है। इसका असर गेहूँ के पैदावार पर पड़ेगा। फरवरी एवं मार्च के महीने तक गेहूँ के दाने पुष्ट नहीं हो पायेंगे। मार्च के महीने में गर्मी पड़ने लगेगी और गेहूँ की फसल अपने नियत समय से पहले सूखने लगेगी। इसका सीधा असर गेहूँ की फसल के पैदावार पर पड़ेगा। गेहूँ के उत्पादकता में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। इससे किसानों के माथे पर बल पड़ने लगा है। उन्हें वर्तमान और भविष्य की चिंता सता रही है। हालांकि इस बारिश से दलहन और तिलहन फसल चना, मसूर, मटर, अरहर, सरसो, तीसी को फायदा पहुॅचेगा।

