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प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित।

पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 3 दिसम्बर। देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बिहार प्रदेश चित्रगुप्त वंशज के प्रदेश अध्यक्ष प्रो लक्ष्मण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि 3 दिसंबर को देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं संविधान सभा के अध्यक्ष देश रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अलावा दो अन्य महान विभूतियों का भी जन्मदिन है। महान क्रांतिकारी अमर शहीद खुदीराम बोस और कायस्थ रत्न, कायस्थ पाठशाला के संस्थापक प्रख्यात बैरिस्टर मुंशी काली प्रसाद कुलभास्कर का भी जन्मदिन है। यह एक गजब संयोग है कि 3 दिसंबर को देश के तीन महान विभूतियों और कायस्थ-रत्नों का जन्मदिन है। इसे अधिवक्ता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। बिहार प्रदेश चित्रगुप्त वंशज के प्रदेश अध्यक्ष प्रो लक्ष्मण कुमार श्रीवास्तव ने इन महान विभूतियों की जयंती के अवसर पर 3 दिसंबर को सरकारी छुट्टी करने की मांग सरकार से की है। उन्होंने कहा कि देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई में हुआ था। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 1963 को पटना में हुई थी। वे 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक देश के राष्ट्रपति के पद पर रहे। अपनी लगन और प्रतिभा के कारण उन्होंने 1902 में मैट्रिक की परीक्षा मे प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी।  उस समय पूर्वोत्तर भारत में कलकत्ता विश्वविद्यालय ही एकमात्र शैक्षणिक संस्थान था। सन 1902 में उन्होंने कलकत्ता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया था। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ विधि परास्नातक (एल एल एम) की परीक्षा पास की। बाद में उन्होंने लाॅ के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। 5 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक मौलवी साहब से फारसी की शिक्षा लेना शुरू किया। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने छपरा के जिला स्कूल से ली। 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। विवाह के बाद भी उन्होंने अपनी शिक्षा पटना के टीके घोष अकादमी से जारी रखी। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका पदार्पण एक वकील के रूप में हुआ। गोपाल कृष्ण गोखले और बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंहा जैसे विद्वानों का ध्यान उन्होंने अपनी ओर आकर्षित किया था। राजेंद्र बाबू महात्मा गांधी के निष्ठा, समर्पण एवं साहस से बहुत प्रभावित हुए और 1928 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सीनेटर का पद त्याग दिया तथा स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। वे 1934 और 1939 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। भारत के पहले मंत्रिमंडल 1946 एवं 1947 में उन्होंने कृषि और खाद्य मंत्री का दायित्व संभाला था।
एसआरपी कॉलेज फतेहपुर पटना मे भी डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर प्राचार्य अजय कुमार, प्रो लक्ष्मण कुमार, डॉ रमाशंकर, प्रो बबीता कुमारी, सुमित कुमार, गुंजन कुमार दास, अजीत कुमार, सुधीर कुमार, शशि कुमार, मोहित कुमार, शंभू, अमित एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

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