
RKTV NEWS/अनिल सिंह 21 नवंबर। कभी लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के सहयोगी रहे व उनके नाटकों ,गीतों को या यूं कहे की भिखारी ठाकुर की लोक गायिकी की परंपरा को आजीवन बढ़ाने वाले 116 वर्षीय रामाज्ञा राम उर्फ मलिक जी के निधन की कहानी भी भिखारी ठाकुर की तरह बन कर रह गई।भिखारी ठाकुर की परंपरा की गायिकी का गुण रामाज्ञा राम से सीख कर भी भोजपुरी की गायिका कल्पना पटवारी ने उनके निधन पर मौन साध लिया जबकि अपना गुरु मानते हुए कल्पना उनका चरण स्पर्श किया करती थी।इस बात का खुलासा आज भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान की टीम के समक्ष उनके नाती पोतों ने किया।

टीम में भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह,रामजी प्रसाद और वरिष्ठ रंगकर्मी कृष्णेंदु शामिल थे। मशहूर गायिका कल्पना पटवारी के संग रामाज्ञा राम को सोशल मीडिया पर देखा जा सकता हैं।

ज्ञातव हो की रामाज्ञा राम की स्वाभाविक मृत्यु 16 नवंबर की रात्रि करीब 10 बजे के आसपास कोइलवर प्रखंड अंतर्गत डुमरिया गांव स्तिथ उनके पैतृक निवास के दालान में हो गई थी।जिनका दाह संस्कार अहले सुबह केशोपुर पूल के पास गंगा नदी के तट पर किया गया। जहां न ही कोई उनके प्रशंसक थे न ही क्षेत्र के कोई जनप्रतिनिधि या शासन प्रशासन। एक खामोशी के साथ सिर्फ परिजनों की उपस्तिथि में धूं धूं कर गंगा की गोद में समा गए रामाज्ञा राम उर्फ मलिक जी।

रामाज्ञा राम की उत्तरी लेने वाले पोता धर्मेंद्र पासवान , नाती मुन्ना राम,पोता संतोष पासवान समेत परिवार की महिलाओं ने बताया की दादा के मोबाइल से नंबर निकालकर सभी को सूचना दी गई पर किसी की उपस्तिथि नही हो सकीं।
संतोष पासवान व परिजनों ने बताया की इसी गांव का एक लड़का संदीप जो रामाज्ञा राम के साथ अंतिम दिनों में साथ रहता था ने हमलोगों को बताया की वीडियो कॉल से हमने गायिका कल्पना जी को निधन की जानकारी दे दी है और उनसे बातचीत भी हुई है लेकिन परिजनों का कहना है की अभी तक कल्पना जी ने हमलोगों के द्वारा भेजे गए व्हाट्सप पर संदेशों को भी नही देखा है न ही कोई जवाब आया है

साथ ही जिला ज्वार से भी कोई नही आया जो बात बात पर रामाज्ञा राम को रामाज्ञा जी या मलिक जी कहकर भिखारी ठाकुर की गायिकी और नाटकों का मंचन कराने के लिए उन्हें खोजते थे।परिजन बताते है की इस वर्ष हमारे परिवार में 4 लोगो की मौतें हुई है जिसमे एक माह पूर्व 17 वर्षीय मोहित पासवान की मौत डेंगू बीमारी से हिमांचल प्रदेश में हुआ। मृतक मोहित पासवान की 45 वर्षीय मां फूलझारो देवी बताती है कि मेरा लड़का वहां शीशा फैक्ट्री में काम करता था जिसका दाह संस्कार भी वही हुआ अपनी दयनीय स्थिति का जिक्र परिजन बार बार करते रहें।
बहरहाल जिस तरह लोक कलाकार भिखारी ठाकुर (नाई) का भी दाह संस्कार खामोशी से हो गया था उसी तरह इनके सहयोगी रामाज्ञा राम(पासवान) भी खामोशी की तरह गंगा की गोद में समां गए पर एक सवाल खासकर भोजपुरिया समाज और भोजपुरी की लड़ाई लड़ने वाले और लोक गायिकी की बातें करने वाले असंख्य संगठनो के समक्ष छोड़ गए की समाज इस पर चिंतन और मनन करें।

