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सारण:चमकी बुखार की आहट पर एक्शन में विभाग, डॉक्टरों को मिला ‘लाइफ-सेविंग’ ट्रेनिंग।

अस्पतालों में अलर्ट, डॉक्टरों की स्पेशल ट्रेनिंग।

चमकी बुखार और जेई से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग है तैयार।

सभी अस्पतालों में बनाया गया है एईएस वार्ड।

RKTV NEWS/छपरा(सारण)25 मार्च।जिले में हर साल गर्मी के मौसम में बढ़ने वाले चमकी बुखार (एईएस) और जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सदर अस्पताल में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं चयनित मेडिकल ऑफिसरों को उपचार संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की गहन जानकारी दी गई।

गंभीर मरीजों के प्रबंधन की मिली जानकारी

प्रशिक्षण शिविर की अध्यक्षता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने की, जबकि सदर अस्पताल के चिकित्सक एवं मास्टर ट्रेनर डॉ. मयंक कुमार ने विशेषज्ञ के रूप में चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान एईएस के लक्षणों की पहचान, प्राथमिक उपचार, रेफरल प्रणाली और गंभीर मरीजों के प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि एईएस के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, अचानक बेहोशी या चेतना में बदलाव, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में ऐंठन, रक्त संचार में गड़बड़ी और हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर की कमी) शामिल हैं। ऐसे मामलों में प्राथमिक स्तर पर त्वरित उपचार शुरू करते हुए मरीज को तत्काल उच्च स्तरीय अस्पताल रेफर करना बेहद जरूरी है। इस मौके पर डीपीएम अरविन्द कुमार, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, जिला वेक्टर रोग सलाहकार सुधीर कुमार, वीडीसीओ सतीश कुमार, वीडीसीओ पंकज तिवारी समेत अन्य मौजूद थे।

आवश्यक दवाओं की उपलब्धता

प्रशिक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि समय पर पहचान, त्वरित चिकित्सा सुविधा, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और जनजागरूकता के माध्यम से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएचसी और सीएचसी स्तर पर चिकित्सकों को सतर्क रहने तथा हर संदिग्ध मरीज पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर लिया गया है। ग्लूकोज, एंटीबायोटिक, एंटीपायरेटिक दवाएं, ऑक्सीजन सिलेंडर सहित सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही अस्पतालों में एईएस वार्ड स्थापित किए गए हैं, जहां विशेष रूप से मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने बेड क्षमता बढ़ाने, आईसीयू सुविधा को मजबूत करने, ऑक्सीजन सप्लाई सुचारू रखने और एम्बुलेंस सेवाओं को तत्पर रखने के निर्देश भी जारी किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने अपील की है कि बच्चों में बुखार या असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। जागरूकता और समय पर इलाज ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

एईएस के लक्षण

• एईएस मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करता है
• तेज बुखार
• सिरदर्द
• उल्टी
• बेहोशी या अचेत अवस्था
• शरीर में ऐंठन (दौरा)
• अत्यधिक कमजोरी
• मानसिक भ्रम या प्रतिक्रिया में कमी
• यदि बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाना चाहिए।

एईएस से बचाव के उपाय

• बच्चों को रात में खाली पेट नहीं सुलाएं।
• सुबह उठते ही कुछ मीठा या पौष्टिक भोजन अवश्य दें।
• बच्चों को स्वच्छ एवं संतुलित आहार दें।
• गंदगी एवं मच्छरों से बचाव करें।
• तेज बुखार या बेहोशी की स्थिति में घरेलू उपचार में समय न गंवाएं, तुरंत अस्पताल जाएं।

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