आरा/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 01 नवंबर। देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री आयरन लेडी इंदिरा गांधी का शहादत दिवस और पूर्व गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जयंती समारोह कांग्रेस कार्यालय शहीद भवन आरा में मंगलवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक राम की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा पूर्व गृह मंत्री वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया तथा दोनों महान नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक राम ने कहा कि आयरन लेडी के नाम से प्रसिद्ध इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के बनने के बाद भारत की दशा और दिशा ही बदल दी। 1955 से वे राजनीति को गहराई से समझने लगी थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई उपलब्धियां अपने नाम की। श्रीमती इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक लगातार प्रधानमंत्री बनी रहीं। इसके बाद 1980 से 1984 तक वे प्रधानमंत्री के पद पर रहीं। हालांकि 1984 में बदले की भावना से उनके अंगरक्षकों ने ही उनकी हत्या कर दी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने
19 जुलाई 1969 को बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर एक महत्वपूर्ण एवं अभूतपूर्व फैसला लिया। 19 जुलाई 1969 को इंदिरा गांधी की सरकार ने अध्यादेश पारित किया और 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। देश में आर्थिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस तरह का अहम फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सरकारी करण पर जोर दिया जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निजीकरण पर जोर दे रहे हैं। उनका रुझान निजीकरण की प्रति ज्यादा है। पाक सैनिकों के दुर्व्यवहार से तंग आकर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थी भारत आ रहे थे जिसका असर देश पर पड़ रहा था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्र कराकर बांग्लादेश बना बनवाया। श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने 18 मई 1974 को पोखरण में परमाणु परीक्षण करके दुनिया को चौंका दिया था। इंदिरा जी के कई अहम फैसलों ने देश को सशक्त एवं मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया।
देश के प्रथम गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए कई कङे कदम उठाये। उनके द्वारा लिए गए कड़े और सार्थक कदम के कारण ही उन्हें सरदार और लौह पुरुष की उपाधि दी गई। इस अवसर पर विजय दुबे, रजी अहमद, वीरेंद्र मिश्रा, सैयद राशिद हुसैन, पन्नग त्रिपाठी, अशोक यादव, श्रीधर तिवारी, अमित द्विवेदी, जितेंद्र शर्मा, सत्य प्रकाश राय, प्रभा सिंह यादव, अरुण कुमार सिंह, विजेंद्र राय, शशिकांत तिवारी, गोपाल कृष्ण गोखले, जंग बहादुर सिंह, अंजनी कुमार, लाल मोहन सिंह, लुटावन चौरसिया, प्रमोद राय, भास्कर मिश्रा, नर्वदेश्वर ओझा, अंजनी कुमार पांडे, संपत सिंह, घनश्याम चौधरी, सूर्य प्रकाश, अरुण कुमार, शिव कुमार राम, राम मूरत राम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता, कार्यकर्ता एवं लोग उपस्थित थे।
