पटना/बिहार 28 सितंबर। आज नई दिल्ली/पटना. राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र, पटना में आयोजित छह दिवसीय किताब उत्सव का गुरुवार को समापन हुआ। समापन सत्र में बिहार के पूर्व-मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य शिवानन्द तिवारी की किताब ‘सड़क से संसद तक’ का लोकार्पण किया। इस किताब में शिवानन्द तिवारी द्वारा राज्यसभा में दिए गए भाषण और दलीलें संकलित है। इसका सम्पादन कुमार मुकुल ने किया है, वहीं भूमिका अरविन्द मोहन ने लिखी है।
लोकार्पण के मौके पर लालू प्रसाद यादव ने कहा, “आज देश बदल रहा है। देश में साम्प्रदायिक ताकतों का बोलबाला हो गया है। यहाँ तक कि संविधान को भी बदलने के प्रयास हो रहे है। ऐसे समय में हमेशा सेक्युलरिज्म के समर्थक रहे शिवानन्द जी की बातों की अहमियत बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने हमेशा गरीब लोगों की भलाई के लिए काम किया है।” उन्होंने कहा, “शिवानन्द जी के भाषणों का यह संग्रह सबके लिए उपयोगी होगा। इस संग्रह के प्रकाशन के लिए मैं शिवानन्द जी और राजकमल प्रकाशन दोनों को बधाई देता हूँ।” वहीं शिवानन्द तिवारी ने कहा, “आज हम देखते हैं कि देश में सांप्रदायिकता और पूँजीवाद का एक गठबंधन हो चुका है। राजनीति में मूल्यों की कोई जगह नहीं रह गई है।” आगे उन्होंने कहा, “हमने एमएलए या एमपी बनने के लिए राजनीति नहीं की। हमने सिद्धांतों की राजनीति की है। कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।” इसके बाद राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इससे पहले कार्यक्रम के एक अन्य सत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीवनी ‘नीतीश कुमार : अंतरंग दोस्तों की नज़र से’ के लेखक उदयकान्त मिश्र नीतीश कुमार के एक आंदोलनकारी छात्रनेता से शीर्ष राजनेता बनने की कहानी बतायी। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार में नेतृत्व का गुण हमेशा से रहा है। कॉलेज के दिनों में भी संघर्ष के समय जब कोई आगे आने के लिए तैयार नहीं होता था तो नीतीश आगे आकर सबका नेतृत्व करते थे।” उन्होंने कहा, “छात्र राजनीति के दौरान जब नीतीश जेल जाते तो बाकी कैदियों की परेशानियों को देखकर उनके लिए जेलर से लड़ जाते थे।” इस तरह उन्होंने श्रोताओं को नीतीश कुमार के जीवन से जुड़े कई अनसुने किस्से सुनाए।
वहीं ‘समकालीन कला परिदृश्य में बिहार’ विषय पर परिचर्चा के सत्र में विनय कुमार और अनीश अंकुर ने विषय को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बिहार की कला अपने समकालीन समय को हमेशा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती रही है। कला अब हमारे देवी-देवताओं के चित्रों तक सीमित नहीं रह गई है, वह उससे बहुत आगे बढ़ चुकी है।
किताब उत्सव के दौरान लगाई गई पुस्तक प्रदर्शनी से साहित्यप्रेमियों ने विशेष रूप से नई किताबों को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। इन दिनों आलोकधन्वा के नए कविता संग्रह ‘मुलाकातें’, प्रभात प्रणीत के उपन्यास ‘वैशालीनामा’, तैयब हुसैन की किताब ‘भिखारी ठाकुर : अनगढ़ हीरा’, विहाग वैभव के कविता संग्रह ‘मोर्चे पर विदागीत’ आदि को बहुत पसन्द किया।
