
आरा/भोजपुर 14 सितंबर। आज हिंदी दिवस के अवसर पर युवा साहित्यकार और डीएवी स्कूल के शिक्षक सुमन कुमार सिंह ने हिंदी की महत्ता उसकी तत्कालीन और भविष्य की होने वाली स्थितियों को अपनी काव्य रचना “क्या कर लोगे” में दर्शाया है।
क्या कर लोगे?
संस्कृरत औ’ हिंदी वाले
अरबी वाले सिंधी वाले
अंगरेजी की उतरन ओढ़े
पाई वाले बिंदी वाले
क्या कर लोगे पाठ पढ़ा के
क्या कर लोगे सिर सहला के
आदम को रचने के साँचे
ले भागे वे सब बहला के
ना पैदल दोपहिया वाले
शिष्य हुए चौपहिया वाले
इंग्लिश-विंग्लिश पढ़ा करो
तुम नये मसौदे गढ़ने वाले
हिंदी-विंदी के चक्कर में
रोटी भी लुढ़की गट्टर में
ये हिज्जे-हुज्जत की भाषा
रही आस बस यूएनओ में
ना ‘केदार’ ‘तिरलोचन’ बोले
आँख न ‘बाबा नागा’ खोले
ना ‘महबीरी’ ना ‘रघुवीरी’
हिंगलिशिया सिर चढ़के बोले
निचुड़ा खूँ का कतरा-कतरा
देह का सूखा कोना-अँतरा
हो निढाल पड़ जाता ये मन
नहीं फिकर न कोई खतरा
क्या कर लोगे ‘भाव’ बता के
क्या कर लोगे ‘मरम’ बता के
कान्वेंट की हुकुम बजाओ
सर जी डेली दिवस मना के !
