
छपरा/बिहार 17 अगस्त।गंगा-सरयू व सोन के संगम पर स्थित व्यापारिक दृष्टि से डोरीगंज एवम् ऐतिहासिक स्थल के रूप में चिरांद धीरे-धीरे पुनः जागृत हो रहा है। डोरीगंज एक ऐसे बिज़नेस सेंटर के रूप में आगे बढ़ रहा है जहां सड़क, जल मार्ग की पहुँच है। यह भारत के उन महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है जहां तीन नदियों का मिलन व्यापारिक आवश्यकताओं एवम् आवाजाही के संदर्भ में स्थापित मान्यताओं को बदला है। इस जल व्यापार मार्ग पर डोरीगंज एक शिप मर्चेंट स्टेशन के रूप में कार्य करते हुए नया बिज़नेस सेंटर के रूप में उभर सकता है। जलयानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए डोरीगंज बिहार में एक केंद्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
उक्त बातें जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. फारूक अली ने जनहित फ़ाउंडेशन ट्रस्ट के कार्यालय का उद्घाटन समारोह में कही। मंगलवार को डोरीगंज में जनहित फ़ाउंडेशन ट्रस्ट कार्यालय के उद्घाटन के दौरान कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । इसके बाद मंच पर सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान के साथ जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद राय के द्वारा स्वागत उद्बोधन किया गया। इस दौरान चिरांद माध्यमिक विद्यालय में डोरीगंज, चिरांद, और आसपास के सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्धजन एवम् पत्रकार मौजूद रहें।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रियल लाइफ हीरों अवार्ड से सम्मानित विकास चंद्रा उर्फ़ गुड्डू बाबा मौजूद रहे। इस उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में वेटेरंस फ़ोरम, ग्रेटर नोएडा के महासचिव डॉ.बी.एन.पी. सिंह शामिल थे। मंच संचालन जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद राय के द्वारा किया गया वही धन्यवाद ज्ञापन राजनैतिक एवम सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल मन्नान कुरैशी ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम कुलपति प्रो. फारूक अली ने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए समाज को एकजुट होना होगा। जब तक समाज एक स्वर में आवाज नहीं उठायेगा तक शासन, प्रशासन, राजनैतिक व्यवस्था के लोग समस्याओं को नहीं समझेंगे। कुलपति प्रो. अली ने कहा की जब समस्या स्वयं से जुड़ी हो तो स्वयं ही लड़ना होगा। व्यक्तिगत बातों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।
अपने संबोधन के दौरान वेटेरंस फ़ोरम, ग्रेटर नोएडा के महासचिव डॉ.बी.एन.पी. सिंह ने जनहित से संबंधित मुद्दों को केंद्र में रख कर कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब सरकार आम आदमी की समस्याओं को नहीं समझता है तो क़ानून का सहारा लेकर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना होता है। श्री सिंह ने कहा की डोरीगंज क्षेत्र में बालू घाट से 50 से 70 हज़ार लोगों को प्रतिदिन रोज़गार प्राप्त होता है। लेकिन इस व्यवसाय में रोज़गार देने एवम् पाने वाले दोनों जीवन जीने के मूल सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है। लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवम् अप्रत्यक्ष रोज़गार देने वाला डोरीगंज जैसा व्यापारिक केंद्र अपने गुमनामी एवम् प्रशासनिक बेरुख़ी के कारण बर्बाद होते जा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह व्यापार केंद्र मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। जबकि ऐसा महत्त्वपूर्ण स्थान एक प्रसिद्ध व्यापारिक एवम् सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित होना चाहिए था। श्री सिंह ने कहा की बालू व्यापारियों, नाविकों की समस्याओं को लेकर व्यवस्थित रूप से लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिहार सरकार सुधा परियोजना को सफल बनाया है। उसी तरह बालू से जुड़े सभी श्रमिकों, व्यापारियों को एक साथ लेकर सहकारिता के बल पर नया मॉडल विकसित किया जा सकता है। जनहित फ़ाउंडेशन के प्रयास से नाविकों एवम् बालू कारोबारियों के कल्याण के लिए क़ानून बनवाने, लघु खनिज को ढोने में लगे नावों का पंजीयन करने और इंश्योरेस करवाने के लिए कार्य किया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रियल लाइफ हीरों अवार्ड से सम्मानित विकास चंद्रा उर्फ़ गुड्डू बाबा ने बालू कारोबार एवम् नाव परिचालन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि सरकार नियम के तहत कार्य करते हुए सुविधा देती है तो केवल बालू उद्योग बिहार में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। गुड्डू बाबा ने कहा की जनहित फ़ाउंडेशन के माध्यम से बालू श्रमिकों, नाव के मालिकों, नाव पर कार्य करने वाले मज़दूरों, ट्रक मालिक, ट्रक पर कार्य करने वाले श्रमिकों एवम् लघु खनिज से संबंधित व्यक्तियों के कल्याण के लिए कार्य किया जाएगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जनहित फाउंडेशन के सचिव बिपिन कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष उदय कुमार चौधरी, ट्रस्टी भानू प्रताप सिंह, ओमप्रकाश राय, अशोक कुमार यादव, जय प्रकाश यादव, रामजी राय, रविन्द्र कुमार यादव, संतोष कुमार भोला जी, दिलीप कुमार राम, शिक्षक सुदर्शन प्रसाद राय, पूर्व मुखिया सुरेंद्र राय, अंजू रोमा, अशोक कुमार सिंह, प्रो.पृथ्वीराज सिंह, गणेश चैरसिया, आरती सहनी, श्यामबाबू राय, बालेश्वर चौरसिया, रजनीश गौरव, मोतीलाल यादव, छठीलाल राय, बीरेंद्र सिंह, राजेश कुमार, संजय यादव के साथ अन्य लोगों की सक्रीय भूमिका रही।
