आरा/भोजपुर (अमरेश सिंह) 27 जुलाई।आशा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर आशा कर्मीयों और फैसिलिटेटर की हड़ताल 12 जुलाई से जारी है आज हड़ताल का 16 वां दिन है। जिनके समर्थन में भाकपा माले के राज्य कमिटी सदस्य कयामुद्दीन अंसारी ने कहा की आशा कार्यकर्ता और फैसिलिटेटर के हड़ताल के प्रति सरकार उदासीन है। 1000 पारितोषिक पर 24 घंटा की डयूटी कराना इनकी गुलामी नहीं तो और क्या है ?इस हड़ताल का समर्थन करने आज भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य क्यामुद्दीन अंसारी आरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे और आशा कार्यकर्ताओं के आंदोलन मे भाग लिया।
आशा और फैसिलिटेटर के हड़ताल के धरना को संबोधित करते हुए भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य क्यामुद्दीन अंसारी ने कहा कि आशा बहनों के हड़ताल ने पुरे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को चरमरा दिया है।पूरे बिहार की स्वास्थ्य सेवा ठप पड़ गयी है।
भाकपा माले नेता ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री इस पर पहल कर आशा कार्यकर्ताओं की जायज मांगो जैसे आशा कार्यकर्ता और फैसिलिटेटर को सरकारी कर्मा का दर्जा शीध्र दें।1000पारितोषिक की जगह 10000 मानदेय शीध्र दी जाय।उन्होंने कहा की इनकी सभी तरह की बकाया को शीध्र दिया जाए।
आशा और फैसिलिटेटर को 20 दिन के बजाय एक माह का यात्रा भत्ता दिया जाए।भत्ता प्रतिदिन 500 रुपये की दर से दी जाय।
भाकपा माले नेता क्यामुद्दीन अंसारी ने कहा कि भाकपा माले आशा और फैसिलिटेटर के सभी मांगों का समर्थन करता है। स्वास्थ्य मंत्री इस हड़ताल के नेताओं से वार्ता कर इनकी मांगों को स्वीकार करते हुए हड़ताल समाप्त कराये।

