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राजस्थान की एक और अभिनव पहल- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए विधेयक पारित करने वाला पहला राज्य।

जयपुर/राजस्थान 25जुलाई। राज्य सरकार ने ओला, स्विगी, उबर, जोमेटो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से गिग वर्कर्स के रूप में जुड़े लाखों युवाओं को सौगात दी है। इन गिग वर्कर्स के हितों का संरक्षण कर अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर राज्य विधान सभा ने सोमवार को राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) विधेयक – 2023 पारित किया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आजीविका अर्जित कर रहे लाखों गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए विधेयक पारित करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना है। इसके माध्यम से बनने वाले अधिनियम के अंतर्गत राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाएगी। साथ ही, राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार सामाजिक सुरक्षा और कल्याण निधि का गठन किया जाएगा।
यह बोर्ड प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स का पंजीकरण सुनिश्चित करेगा। साथ ही, पंजीकृत गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए योजनाओं को मॉनिटर करने के साथ ही ऐसी योजनाओं के प्रशासन के लिए राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें देगा। बोर्ड यह भी सुनिश्चित करेगा कि इन योजनाओं के अनुसार फायदों तक गिग वर्कर्स की पहुंच हो और उनके कार्य करने की स्थिति बेहतर हो। यह बोर्ड गिग वर्कर्स के अधिकारों से सम्बन्धित शिकायतों और अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन से सम्बन्धित मामलों का समयबद्ध निवारण भी सुनिश्चित करेगा।
गिग वर्कर्स के पंजीकरण के लिए एग्रीगेटर अधिनियम के लागू होने के 60 दिनों में गिग वर्कर्स का डेटा बेस राज्य सरकार को उपलब्ध कराएंगे। राज्य सरकार एग्रीगेटर्स का रजिस्टर अपने वेब पोर्टल पर प्रकाशित करेगी। इस अधिनियम से गिग वर्कर्स को राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा और उनकी शिकायतों पर उन्हें सुनवाई का अवसर प्राप्त होगा।
गिग वर्कर्स का बोर्ड में प्रतिनिधित्व भी होगा जिससे वे उनके कल्याण के लिये लिए जाने वाले निर्णयों में भाग ले सकेंगे। अधिनियम के अंतर्गत गिग वर्कर्स के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की जाएगी जिसके समक्ष व्यक्तिश: अथवा ऑनलाइन माध्यम से याचिका प्रस्तुत की जा सकेंगी।
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में कम कौशल वाले युवाओं के लिए गिग कार्य से रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। अर्थव्यवस्था और रोजगार में बड़े योगदान के बावजूद गिग वर्कर्स अभी तक श्रम कानूनों के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में उन्हें पारम्परिक कर्मचारियों की तरह संरक्षण नहीं मिल पाता है। इस अधिनियम से गिग वर्कर्स के हितों का संरक्षण होगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने व शोषण से बचाने के लिए गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट लाने तथा इसके अंतर्गत गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने 200 करोड़ की राशि से गिग वर्कर्स वेलफेयर एंड डवलपमेंट फंड के गठन की भी घोषणा की थी।

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