
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 29 अगस्त। सावन महीने की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार खुशी-खुशी पारंपरिक रूप से संपन्न हो गया। इस अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। बहनों ने सजधज कर तैयार होकर भाई की आरती उतारी। अक्षत और रोली का टीका लगाया। भाई की कलाई पर राखी बांधा और भाई को तरह-तरह का मिठाई खिलाया। बहनों ने भाई के लंबी उम्र की कामना की। वहीं भाइयों ने बहनों की रक्षा का वचन दिया। रक्षाबंधन के अवसर पर बांधी गई राखी की डोरी भाई- बहन के अटूट प्रेम की निशानी है। बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधी गई राखी का विशेष महत्व है। राखी की डोरी मात्र डोरी नहीं है बल्कि रक्षा सूत्र है। रक्षा सूत्र का भावनात्मक महत्व है। एक तरफ जहाॅ बहनें भाईयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं वहीं दूसरी तरफ भाई बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। कुछ बहनें भाई के साथ-साथ भतीजा को भी राखी बांधती हैं।
रक्षाबंधन का त्यौहार समय के साथ नया आयाम ले रहा है। उसे नये फैशन की भी संज्ञा दी जा सकती। कई बहनें भाई के साथ भाभियों को भी राखी बांध रही हैं। धीरे-धीरे यह प्रचलन बढ़ने लगा है। यह ननद और भाभी के बीच प्यार और सम्मान को दर्शाता है। 
