साहित्य सम्मेलन में पुस्तक ‘सर्जना के स्वर रत्नेश्वर’ का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)21 अगस्त।। काव्य-साहित्य में अत्यंत मूल्यवान अवदान दे रहे मंचों के लोकप्रिय कवि डा रत्नेश्वर सिंह काव्य-मणिमाला के निपुण मालाकार हैं। जिस निपुणता से वे काव्य की मणि-माला में शब्द-मणि पिरोते हैं, वह दर्शनीय है। उनमें केवल काव्य-लालित्य और चकित करने वाली काव्य-कल्पनाएँ ही नहीं, भाव का गांभीर्य, समाज की मार्मिक-पीड़ा और लोक-मंगल के दिव्य भाव भी लक्षित होते हैं, जो किसी भी काव्य को पूर्ण और अर्थपूर्ण बनाने के लिए अनिवार्य तत्त्व हैं।
यह बातें शुक्रवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, सम्मेलन द्वारा प्रकाशित और कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय द्वारा संपादित पुस्तक ‘सर्जना के स्वर रत्नेश्वर’ के लोकार्पण-समारोह एवं कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि ‘कविता’ की परिभाषा के आलोक में रत्नेश्वर की रचनाएँ श्रेष्ठ मानी जानी चाहिए, क्योंकि इनकी रचनाएँ, पाठकों और श्रोताओं के मन पर उन्हीं भावों का गहरा प्रभाव उत्पन्न करती हैं, जिन भावों के घनीभूत होने से वह कवि के मानस से उतर कर कंठ से प्रसूत हुई है।
डा सुलभ ने कहा कि लोकार्पित पुस्तक, एक प्रकार से डा रत्नेश्वर के संपूर्ण साहित्यिक व्यक्तित्व को प्रकाश प्रदान करती है। इसमें कवि की कृतियाँ भी हैं और कवि पर अनेक समकालीन कवियों साहित्यकारों के विचार भी हैं, जो कवि के संपूर्ण व्यक्तित्व को समझने का व्यापक आधार प्रदान करते हैं। शब्दों की मणिमाला गुँथने में परमात्मा ने इन्हें दिव्य कौशल प्रदान करने की महनीय कृपा की है। समाज की पीड़ा को जिस चेतना से इन्होंने समझा है, वह किसी भी कवि को अर्थवान और मूल्यवान बना सकती है। उन्होंने पुस्तक के संपादक और कवि श्री ब्रह्मानन्द पाण्डेय को भी उनके उद्यम के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर सम्मेलन अध्यक्ष ने ग्वालियर से पधारीं वरिष्ठ कवयित्री डा शकुन्तला तोमर को सम्मेलन की ओर से ‘साहित्य साधना सम्मान’ से विभूषित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि और दूरदर्शन बिहार के कार्यक्रम-प्रमुख डा मनोज प्रभाकर, पूर्व-प्रमुख डा राज कुमार नाहर, दरभंगा से पधारे वरिष्ठ कवि डा अमरकान्त कुमर, सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी, डा शशि भूषण सिंह और विभा रानी श्रीवास्तव ने भी डा रत्नेश्वर के साहित्यिक व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उन्हें लोकार्पित पुस्तक के लिए बधाइयाँ दीं।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का आरम्भ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, शमा कौसर ‘शमा’, ज़ीनत शेख़, प्रो एहशान शाम, मधुरानी लाल, शुभचंद्र सिन्हा, विद्यापति चौधरी, अमीना खातून, सागरिका राय, कुमार अनुपम, करुणा पीटर कमल, अमित कुमार मिश्र, सिद्धेश्वर, सदानन्द प्रसाद, विजयव्रत कंठ, ईं अशोक कुमार, सूर्य प्रकाश उपाध्याय,बिंदेश्वर प्रसाद गुप्त, इन्दुभूषण सहाय, रजनीश कुमार गौरव, राज प्रिया रानी आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के पाठ किए। मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
व्यंग्यकार बाँके बिहारी साव, डा निगम प्रकाश नारायण, चित्तरंजन लाल भारती, प्रवीर कुमार पंकज, सच्चिदानन्द शर्मा, प्रेम अग्रवाल, कुमारी क्रांति, विजय कुमार सिंह, नरेश कुमार, अश्विनी कुमार, मो फ़हीम, अभिराम आदि सुधी जन समारोह में उपस्थित थे।


