
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 अगस्त। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), भोजपुर द्वारा सरल योजना के तहत आयोजित पांच दिवसीय ‘नर्सरी ग्रोवर, उद्यान’ कौशल विकास प्रशिक्षण के तीसरे दिन प्रतिभागियों को संरक्षित खेती एवं आधुनिक नर्सरी उत्पादन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया ताकि दक्ष बनाकर नर्सरी उत्पादन के क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में विकसित बन सके।
उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. विकास सिंह ने प्रतिभागियों को कम लागत वाले लो-टनल, पॉलीहाउस एवं शेडनेट हाउस की संरचना, निर्माण विधि, उपयोगिता तथा संरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।प्रशिक्षणार्थियों ने स्वयं ग्रोइंग मीडिया तैयार किया और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में प्रो-ट्रे में फूलगोभी के बीजों की वैज्ञानिक विधि से बुवाई की। इस दौरान बीज उपचार, मीडिया तैयार करने की विधि, ट्रे भरने की तकनीक, बुवाई की गहराई, सिंचाई प्रबंधन तथा अंकुरण के बाद पौधों की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का अभ्यास कराया गया। वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. शोभा रानी ने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों में व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास और उद्यमिता क्षमता का विकास करना है, ताकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे स्वयं का नर्सरी उद्यम स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। आगामी प्रशिक्षण में सिंचाई प्रबंधन, नर्सरी प्रबंधन, पौध विपणन तथा नर्सरी उद्यम की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
