
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 अगस्त। श्रावण मास के पावन अवसर पर कतीरा स्थित सहदेव गिरि शिव मंदिर में आयोजित श्रीशिवमहापुराण कथा के प्रथम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और भगवान शिव के विधिवत पूजन-अर्चन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
आचार्य डॉ. पाण्डेय ने शिवपुराण की कोटिरुद्र संहिता के प्रथम अध्याय की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि शिव ही सृष्टि के सृजन, पालन और संहार की दिव्य शक्ति हैं तथा वही सनातन सत्य और परमब्रह्म हैं। शिवपुराण मनुष्य को सत्य, करुणा, क्षमा, सेवा, त्याग, संयम और परोपकार जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। भगवान शिव का सरल एवं औघड़ स्वरूप यह संदेश देता है कि ईश्वर बाहरी वैभव से नहीं, बल्कि निष्कपट भक्ति, पवित्र हृदय और सत्यनिष्ठ आचरण से प्रसन्न होते हैं। शिवपुराण के प्रथम अध्याय में कलियुग में मानव कल्याण का सबसे सरल मार्ग भगवान शिव के नाम-स्मरण तथा शिवपुराण के श्रद्धापूर्वक श्रवण को बताया गया है। कथा के दौरान “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। संयोजक एवं मंदिर के पुजारी अजय मिश्र ने बताया कि श्रीशिवमहापुराण कथा आगामी दिनों तक प्रतिदिन आयोजित होगी, जिसमें शिवपुराण के विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
